राजस्थान मूंग किसान संकट: MSP से **15%** नीचे बिक रही फसल, किसानों को भारी नुकसान

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
राजस्थान मूंग किसान संकट: MSP से **15%** नीचे बिक रही फसल, किसानों को भारी नुकसान

राजस्थान में मूंग के किसानों के लिए बुरा दौर शुरू हो गया है। सरकारी MSP **₹8,780** प्रति क्विंटल के मुकाबले बाजार में भाव महज **₹7,452** मिल रहे हैं। **1 सितंबर** से आवक में **10 गुना** उछाल और सरकारी खरीद में देरी से किसानों पर गहरा आर्थिक संकट मंडरा रहा है।

राजस्थान, जो खरीफ सीजन में मूंग का सबसे बड़ा उत्पादक है, वहां के किसान फिलहाल भारी संकट का सामना कर रहे हैं। राज्य की मंडियों में मूंग का भाव सरकारी MSP से काफी नीचे चल रहा है, जिससे उन किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है जिन्हें बेहतर मुनाफे की उम्मीद थी।

आवक में भारी उछाल और मार्केट का हाल

बाजार में अचानक आई बंपर आवक ने पूरी सप्लाई चेन को बिगाड़ दिया है। 1 सितंबर से अब तक मंडियों में करीब 63,000 टन मूंग पहुंच चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10 गुना अधिक है। इतनी बड़ी मात्रा में फसल आने से स्थानीय मंडियां दबाव में हैं और कीमतें लगातार गिर रही हैं।

सरकारी खरीद और खरीद एजेंसियों की सुस्ती

विशेषज्ञों का मानना है कि खरीद प्रक्रिया में खामियां इसका मुख्य कारण हैं। Nafed और NCCF जैसी एजेंसियां राज्य सरकार के निर्देशों का इंतजार करती हैं, जिसके कारण खरीद में देरी होती है। इस देरी के कारण किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। अनुमान के मुताबिक, इस देरी से किसानों को सिर्फ शुरुआती दिनों में ही लगभग ₹14.4 करोड़ का नुकसान हुआ है।

पुरानी स्टॉक की बिक्री का असर

बाजार में मंदी का एक और बड़ा कारण सरकारी स्टॉक का प्रबंधन है। रिपोर्टों के अनुसार, Nafed अपना पुराना स्टॉक ₹6,500 प्रति क्विंटल के भाव पर निकाल रहा है, जिससे नई फसल की कीमतों पर और अधिक दबाव बढ़ गया है। वहीं, 2026-27 सीजन के लिए मूंग की MSP में महज 0.1% की मामूली बढ़ोतरी से भी किसान नाराज हैं।

भविष्य की चिंताएं

इस आर्थिक दबाव का असर खेती के रकबे पर भी दिख रहा है। मूंग की बुवाई का क्षेत्र लक्ष्य से 13% नीचे गिरकर 26.50 लाख हेक्टेयर से कम हो गया है। किसान अब वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करने पर विचार कर रहे हैं। किसान संगठनों की मांग है कि मूंग की खरीद के लिए भी गेहूं और धान की तरह ऑटोमैटिक सिस्टम लागू किया जाए ताकि उन्हें भविष्य में ऐसे संकट से न जूझना पड़े।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.