RESCONS Solutions का कमाल: स्टील में कोयले की जगह लेगा बायोमास, Jindal Steel और Adani Enterprises के साथ बड़ी डील

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AuthorAditya Rao|Published at:
RESCONS Solutions का कमाल: स्टील में कोयले की जगह लेगा बायोमास, Jindal Steel और Adani Enterprises के साथ बड़ी डील

IISc की इनक्यूबेटेड कंपनी RESCONS Solutions ने स्टील बनाने में कोयले की जगह चावल की भूसी से बने बायोमास का सफल ट्रायल किया है। यह टेक्नोलॉजी कार्बन उत्सर्जन घटाएगी और भारत की कोयले पर निर्भरता कम करेगी। कंपनी अब इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में काम कर रही है और Adani Enterprises के साथ मिलकर ज़रूरी मिनरल्स निकालने पर भी काम कर रही है।

स्टील इंडस्ट्री में कार्बन घटाने की बड़ी पहल

बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) से निकली डीप-टेक कंपनी RESCONS Solutions ने सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग (sustainable manufacturing) में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। कंपनी ने स्टील प्रोडक्शन में कोयले के आंशिक विकल्प के तौर पर एग्रीकल्चरल बायोमास (agricultural biomass) के इस्तेमाल का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा में Jindal Steel and Power (JSP) की फैसिलिटी में किए गए ट्रायल्स के दौरान, कंपनी ने चावल की भूसी से बने बायोमास पेलेट्स (biomass pellets) को गैसीफिकेशन प्रोसेस (gasification process) में इस्तेमाल किया।

नतीजे बताते हैं कि कोयले की जगह 5-10% बायोमास पेलेट्स का इस्तेमाल करने से गैसीफायर्स की एफिशिएंसी (efficiency) पर कोई असर नहीं पड़ा, और स्टील बनाने के लिए ज़रूरी सिनगैस (syngas) का प्रोडक्शन भी जारी रहा।

कम कार्बन लागत की ओर बड़ा कदम

भारी इंडस्ट्री में एग्रीकल्चरल वेस्ट (agricultural waste) का इस्तेमाल भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा दोहरा फायदा दे सकता है। सबसे पहले, यह कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन को कम करने का रास्ता दिखाता है, जो स्टील और पावर जैसे कार्बन-इंटेंसिव सेक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती है। दूसरे, इम्पोर्टेड कोयले (imported coal) पर निर्भरता कम करके, कंपनियां अपने रॉ मटेरियल (raw material) की लागत को बेहतर ढंग से मैनेज कर सकती हैं और विदेशी मुद्रा बचा सकती हैं। इस पहल को ऑस्ट्रेलिया की साइंस एजेंसी CSIRO से भी सपोर्ट मिला है।

RESCONS Solutions अब इस टेक्नोलॉजी को रोटरी किन इंडस्ट्रीज (rotary kiln industries) में बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना बना रही है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि भारत के इंडस्ट्रियल सेक्टर में इसे बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए सरकारी नीतियों और ग्रीन एनर्जी (green energy) विकल्पों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन का विकास ज़रूरी होगा।

क्रिटिकल मिनरल एक्सट्रैक्शन में प्रगति

बायोमास के अलावा, यह स्टार्टअप क्रिटिकल मिनरल्स (critical minerals) की सप्लाई चेन पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो हाई-टेक इंडस्ट्रीज के लिए बेहद ज़रूरी हैं। Adani Enterprises के साथ मिलकर, कंपनी ने कच्चे अयस्क से लेकर मेटल स्टेज तक दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (rare earth elements) को निकालने की प्रक्रिया का सफल प्रदर्शन पूरा कर लिया है। इस प्रोजेक्ट को लैब डेमोंस्ट्रेशन से पायलट-स्केल वैलिडेटशन प्लांट (pilot-scale validation plant) तक ले जाने के लिए Adani, अन्य इंडस्ट्रियल पार्टनर्स और मिनिस्ट्री ऑफ माइन्स (Ministry of Mines) के साथ बातचीत चल रही है।

निवेशकों और मार्केट वॉचर्स के लिए, मुख्य बात यह होगी कि कंपनी कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट्स (commercial contracts) हासिल करने और इन टेक्नोलॉजीज को पायलट ट्रायल्स (pilot trials) से फुल-स्केल इंडस्ट्रियल इम्प्लीमेंटेशन (full-scale industrial implementation) तक ले जाने में कितनी सफल होती है। जैसे-जैसे मिनिस्ट्री ऑफ माइन्स क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है, Adani Enterprises के साथ सहयोग की प्रगति और स्टील सेक्टर में बायोमास समाधानों को अपनाने की दर, इन सस्टेनेबल मेटालर्जिकल प्रोसेसेस (sustainable metallurgical processes) की दीर्घकालिक व्यवहार्यता के लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.