Sovereign Gold Bonds: RBI ने खोला प्रीमेच्योर रिडेम्पशन का मौका, जुलाई-सितंबर 2026 तक करें अप्लाई

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Sovereign Gold Bonds: RBI ने खोला प्रीमेच्योर रिडेम्पशन का मौका, जुलाई-सितंबर 2026 तक करें अप्लाई

अगर आपने Sovereign Gold Bonds (SGBs) में निवेश किया है जो 2019 से 2021 के बीच इश्यू हुए थे, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन बॉन्ड्स के प्रीमेच्योर रिडेम्पशन (समय से पहले भुनाने) के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। खास बात यह है कि यह मौका जुलाई से सितंबर 2026 तक मिलेगा।

क्या है RBI का नया ऐलान?

RBI ने साल 2019 से 2021 के बीच इश्यू हुए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGBs) के लिए प्रीमेच्योर रिडेम्पशन (समय से पहले वापसी) की तारीखों का ऐलान कर दिया है। यह उन निवेशकों के लिए है जिन्होंने कम से कम 5 साल का लॉक-इन पीरियड पूरा कर लिया है। ये बॉन्ड्स जुलाई और सितंबर 2026 के बीच रिडीम किए जा सकते हैं।

यह रिडेम्पशन ऑटोमेटिक नहीं होगा। निवेशकों को अपने बॉन्ड्स को उस बैंक या ब्रोकरेज फर्म के ज़रिए अप्लाई करना होगा जहां से उन्होंने इन्हें खरीदा था। उदाहरण के लिए, 2019-20 सीरीज VIII के लिए 20 जून से 13 जुलाई 2026 के बीच अप्लाई किया जा सकता है, जबकि 2021-22 सीरीज VI के लिए 7 अगस्त से 28 अगस्त 2026 तक का समय दिया गया है।

रिडेम्पशन की कीमत कैसे तय होगी?

SGBs की रिडेम्पशन वैल्यू फेस वैल्यू पर नहीं, बल्कि सोने की मौजूदा मार्केट प्राइस पर निर्भर करती है। RBI, इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा रिपोर्ट किए गए 999 प्योरिटी वाले सोने की 3 दिन की क्लोजिंग प्राइस के सिंपल एवरेज के आधार पर कीमत तय करेगा।

इसके अलावा, निवेशकों को 2.5% का सालाना ब्याज भी मिलेगा, जिसकी गणना इश्यू प्राइस पर की जाती है। इसका मतलब है कि अगर 5 सालों में सोने की कीमत बढ़ी है, तो निवेशकों को खरीद मूल्य से ज़्यादा रिटर्न मिल सकता है।

सेकेंडरी मार्केट खरीदारों के लिए टैक्स का नया नियम

1 अप्रैल 2026 से सेकेंडरी मार्केट (जैसे स्टॉक एक्सचेंज) से खरीदे गए SGBs पर कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होगा। पहले, जो लोग सीधे RBI से बॉन्ड इश्यू के समय खरीदते थे और मैच्योरिटी तक रखते थे, उन्हें टैक्स में छूट मिलती थी। लेकिन अब, जिन्होंने दूसरों से ये बॉन्ड खरीदे हैं, उन्हें टैक्स के नए नियमों को समझना होगा।

निवेशक क्यों कर रहे हैं पोर्टफोलियो रिव्यू?

5 साल का प्रीमेच्योर एग्जिट विंडो निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की लिक्विडिटी जांचने का मौका देता है। कई बार सेकेंडरी मार्केट में SGBs डिस्काउंट या प्रीमियम पर ट्रेड करते हैं। ऐसे में, कुछ निवेशक RBI के ज़रिए ऑफिशियल प्राइस पर रिडीम करना पसंद करते हैं, जबकि कुछ को तुरंत पैसे की ज़रूरत होने पर स्टॉक एक्सचेंज पर बेहतर कीमत मिलने पर बेच देते हैं।

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

जो निवेशक अपने SGBs से बाहर निकलना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले अपनी बॉन्ड सीरीज के लिए जारी किए गए स्पेसिफिक रिडेम्पशन विंडो की जांच करनी चाहिए। क्योंकि अप्लाई करने की प्रक्रिया उसी चैनल से होगी जहां से बॉन्ड खरीदा गया था, इसलिए अपने बैंक या ब्रोकर से समय पर संपर्क करना ज़रूरी है। RBI मैच्योरिटी से ठीक पहले सोने की कीमतों के आधार पर ऑफिशियल रिडेम्पशन प्राइस का ऐलान करेगा।

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