भारत ने अब **880 टन** से अधिक सोना अपने देश में सुरक्षित कर लिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अब इस गोल्ड को केवल तिजोरी में रखने के बजाय GIFT City स्थित IIBX के जरिए एक एक्टिव फाइनेंशियल एसेट के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
अब तिजोरी से बाहर आएगा सोना
सालों तक भारत का बड़ा स्वर्ण भंडार Bank of England की तिजोरियों में रखा था, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। वर्तमान में भारत के कुल गोल्ड रिजर्व का करीब 77% हिस्सा अब देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित है। सुरक्षा के इस मोर्चे को पार करने के बाद, अब RBI का फोकस इसे एक फंक्शनल फाइनेंशियल इकोसिस्टम में बदलने पर है।
GIFT City बनेगा नया ट्रेडिंग हब
रणनीति का मुख्य केंद्र GIFT City स्थित India International Bullion Exchange (IIBX) है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां सेंट्रल बैंक और बड़े संस्थानों को स्वैप (swaps), सेटलमेंट और लेंडिंग की सुविधा दी जाए, तो यह London जैसे अंतरराष्ट्रीय गोल्ड ट्रेडिंग सेंटर्स को कड़ी टक्कर दे सकता है।
डेड एसेट से कमाई का जरिया
अभी तक सोना केवल बैलेंस शीट पर एक 'डेड वेट' की तरह रखा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सेंट्रल बैंक इसे उधार देकर या कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल कर मुनाफा कमाते हैं। इस बदलाव के लिए GIFT City के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में हाई-वॉल्यूम ट्रेडिंग की क्षमता तैयार करना जरूरी होगा।
निजी गोल्ड की भी होगी वैल्यू
भारत के पास घरों में पड़ा भारी मात्रा में सोना है। Electronic Gold Receipts के जरिए इस प्राइवेट वेल्थ को फॉर्मल इकोनॉमी से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अगर IIBX घरेलू मार्केट को ग्लोबल मार्केट से सफलतापूर्वक जोड़ देता है, तो भारत केवल सोने का उपभोक्ता नहीं, बल्कि 'मार्केट मेकर' बन सकता है।
