Sovereign Gold Bond: RBI ने तय की ₹14,957 प्रति ग्राम की रिडेम्पशन कीमत, निवेशकों के लिए क्या है मायने?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Sovereign Gold Bond: RBI ने तय की ₹14,957 प्रति ग्राम की रिडेम्पशन कीमत, निवेशकों के लिए क्या है मायने?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के दो खास सीरीज के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्पशन (समय से पहले वापसी) की कीमत **₹14,957** प्रति ग्राम तय की है। यह कीमत 11 अगस्त, 2026 तक के लिए मान्य होगी। सोने की कीमतों में आई भारी उछाल के चलते निवेशकों को तगड़ा कैपिटल गेन मिल रहा है। अब निवेशकों को यह तय करना है कि वे अभी एग्जिट करें और ब्याज आना बंद करें, या मैच्योरिटी तक रुकें।

RBI ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज IX और SGB 2020-21 सीरीज V के लिए ₹14,957 प्रति ग्राम की प्रीमैच्योर रिडेम्पशन कीमत का ऐलान किया है। यह कीमत 11 अगस्त, 2026 को लागू होगी। इसका मतलब है कि जो निवेशक इन बॉन्ड सीरीज को मैच्योरिटी से पहले भुनाना चाहते हैं, उन्हें यह कीमत मिलेगी।

बॉन्ड सीरीज पर शानदार रिटर्न

यह रिडेम्पशन कीमत बताती है कि इन बॉन्ड सीरीज के इश्यू होने के बाद से सोने के भाव में कितनी बढ़ोतरी हुई है।

  • SGB 2019-20 सीरीज IX: यह बॉन्ड फरवरी 2020 में ₹4,070 प्रति ग्राम पर इश्यू हुआ था। अब ₹14,957 प्रति ग्राम की कीमत पर निवेशकों को लगभग 267.5% का कैपिटल गेन मिल रहा है। अगर किसी ने डिजिटल माध्यम से ₹4,020 में सब्सक्राइब किया था, तो रिटर्न और भी ज्यादा होगा।
  • SGB 2020-21 सीरीज V: यह बॉन्ड अगस्त 2020 में ₹5,334 प्रति ग्राम पर इश्यू हुआ था। मौजूदा रिडेम्पशन कीमत पर इस पर करीब 180.4% का कैपिटल गेन हो रहा है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कैपिटल गेन (निवेश मूल्य में बढ़ोतरी) है, न कि ब्याज से होने वाली कमाई। बॉन्ड पर 2.5% का सालाना ब्याज, जो हर 6 महीने में मिलता है, यह अलग से कैलकुलेट होता है और इनिशियल निवेश पर आधारित होता है।

रिडेम्पशन कैलकुलेशन का तरीका

RBI, इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा दिए गए 999 शुद्धता वाले सोने के क्लोजिंग प्राइस के पिछले तीन कारोबारी दिनों के सिंपल एवरेज के आधार पर रिडेम्पशन कीमत तय करती है। 11 अगस्त, 2026 की रिडेम्पशन कीमत 6, 7 और 10 अगस्त के सोने के भावों के आधार पर निकाली गई है।

निवेशकों के लिए जरूरी बातें

  • फैसला सोच-समझकर लें: निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या प्रीमैच्योर रिडेम्पशन उनकी मौजूदा फाइनेंशियल जरूरतों के हिसाब से सही है।
  • ब्याज का नुकसान: अगर बॉन्ड रिडीम किए जाते हैं, तो भविष्य में मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज तुरंत बंद हो जाएगा।
  • लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को 8 साल की मैच्योरिटी के लिए डिजाइन किया गया था, जिसमें सोने की कीमतों का फायदा और फिक्स्ड ब्याज दोनों मिलते हैं। प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की सुविधा 5 साल के लॉक-इन पीरियड के बाद मिलती है।

अगर निवेशकों को तत्काल पैसे की जरूरत नहीं है और वे ब्याज कमाना जारी रखना चाहते हैं, तो वे बॉन्ड को मैच्योरिटी तक रख सकते हैं। रिडीम करने या होल्ड करने का अंतिम फैसला निवेशक की लिक्विडिटी की जरूरत और लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.