SGB 2019-20 Series VII: RBI ने तय की ₹15,275 की रिडेम्पशन कीमत, निवेशकों के लिए बड़ी खबर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SGB 2019-20 Series VII: RBI ने तय की ₹15,275 की रिडेम्पशन कीमत, निवेशकों के लिए बड़ी खबर
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज VII की शुरुआती रिडेम्पशन कीमत ₹15,275 प्रति यूनिट तय कर दी है। 10 जून 2026 को पांच साल का निवेश पूरा करने वाले निवेशक इस कीमत पर बॉन्ड भुना सकते हैं।

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क्या हुआ?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज VII के लिए शुरुआती रिडेम्पशन (भुगतान) की कीमत का ऐलान कर दिया है। जिन निवेशकों ने 10 दिसंबर 2019 को ये बॉन्ड खरीदे थे, वे अब अपने निवेश को भुनाने के पात्र हैं। केंद्रीय बैंक ने ₹15,275 प्रति यूनिट की दर से भुगतान तय किया है, जो 10 जून 2026 को किया जाएगा।

यह कीमत रिडेम्पशन की तारीख से ठीक पहले के तीन कारोबारी दिनों, यानी 5 जून, 8 जून और 9 जून 2026 के लिए 999 शुद्धता वाले सोने की क्लोजिंग कीमत के साधारण औसत (simple average) के आधार पर तय की गई है। ये सोने की कीमतें इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा आधिकारिक तौर पर प्रकाशित की जाती हैं।

निवेशकों के लिए क्यों अहम है ये?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को सरकार ने फिजिकल गोल्ड रखने के एक विकल्प के तौर पर शुरू किया था। ये बॉन्ड निवेशकों को एक तय सालाना ब्याज दर देते हैं, साथ ही निवेश अवधि के दौरान सोने की कीमत में होने वाली बढ़ोतरी का भी फायदा मिलता है। कई निवेशकों के लिए, यह रिडेम्पशन विंडो एक लिक्विडिटी (नकदी) का मौका है, जिससे वे चाहें तो पांच साल बाद अपने गोल्ड इन्वेस्टमेंट को भुना सकते हैं।

इन बॉन्डों को रखने वाले निवेशकों को सोने की कीमत में हुई बढ़ोतरी के अलावा 2.5% प्रति वर्ष की फिक्स्ड ब्याज दर भी मिल रही थी, जिसका भुगतान हर छह महीने में होता है। लॉक-इन पीरियड खत्म होने पर रिडेम्पशन उन निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जिन्होंने 2019 के अंत में इस स्कीम में निवेश किया था।

निवेशक इसे कैसे देखें?

चाहे बॉन्ड को भुनाना है या होल्ड करना है, यह तय करने से पहले निवेशक अक्सर मौजूदा रिडेम्पशन कीमत की तुलना अपने मूल निवेश की लागत से करते हैं। SGB स्कीम पांच साल पूरे होने के बाद ब्याज भुगतान की तारीखों पर शुरुआती रिडेम्पशन की अनुमति देती है। जिन निवेशकों को तुरंत नकदी की ज़रूरत नहीं है, उनके लिए यह फैसला सोने की कीमतों के प्रति उनके दीर्घकालिक दृष्टिकोण और पोर्टफोलियो में आवंटन की ज़रूरत पर निर्भर करता है।

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि फिजिकल गोल्ड के साथ स्टोरेज की लागत और मेकिंग चार्ज जुड़ा होता है, जबकि SGBs में ये नहीं होता। जिन निवेशकों के बॉन्ड मैच्योर हो जाएंगे, उन्हें सीधा पैसा उनके बैंक खातों में मिल जाएगा। अगर कोई निवेशक अभी रिडेम्पशन नहीं चुनता है, तो बॉन्ड ब्याज देना जारी रखेगा और इसे उसकी पूरी मैच्योरिटी (आमतौर पर जारी होने की तारीख से आठ साल) तक रखा जा सकता है।

टैक्स का पहलू

SGBs का एक बड़ा फायदा उनका टैक्स ट्रीटमेंट है। अगर कोई निवेशक मैच्योरिटी तक बॉन्ड रखता है, तो कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट मिलती है। शुरुआती रिडेम्पशन के मामले में, टैक्स के नियम मैच्योरिटी की तुलना में अलग हो सकते हैं। निवेशकों को शुरुआती एग्जिट के लिए विशिष्ट टैक्स नियमों की समीक्षा करनी चाहिए और टैक्स सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए ताकि यह समझ सकें कि यह ट्रांजेक्शन उनकी कुल टैक्स देनदारी को कैसे प्रभावित करेगा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि इन बॉन्डों पर अर्जित ब्याज निवेशक के लागू इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

जो निवेशक अभी भी SGBs की अन्य किस्तों को होल्ड कर रहे हैं, उनके लिए अगली ब्याज भुगतान की तारीख और शुरुआती रिडेम्पशन की अगली उपलब्ध विंडो पर नज़र रखना महत्वपूर्ण है। चूंकि RBI सोने की कीमतों के औसत के आधार पर रिडेम्पशन की कीमत प्रकाशित करता है, इसलिए जब भी उनकी विशिष्ट बॉन्ड ट्रेंच रिडेम्पशन पात्रता तिथि के करीब आती है, तो निवेशकों को एक्सचेंज फाइलिंग और RBI के आधिकारिक सर्कुलर पर अपडेट रहना चाहिए। किसी भी रूप में सोने के मूल्य का आकलन करने के लिए सोने की कीमतों के दीर्घकालिक रुझानों की निगरानी करना सबसे महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.