पंजाब ने माइनिंग नीलामी में किया सुधार, राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य

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AuthorKaran Malhotra | Whalesbook News Team

Overview

पंजाब ने माइनिंग स्थलों के लिए नई नीलामी शुरू की है और लघु खनिज नियम (Minor Mineral Rules) में सुधार लागू किए हैं। पारदर्शी ऑनलाइन बोली और प्रतिस्पर्धी मूल्य मॉडल की ओर यह बदलाव अवैध खनन को रोकने, शुरुआती स्थलों से ₹11.61 करोड़ राजस्व बढ़ाने और बोलीदाताओं पर पर्यावरणीय मंजूरी की जिम्मेदारी डालकर संचालन को सुव्यवस्थित करने का लक्ष्य रखता है, साथ ही पट्टे की अवधि को पांच साल तक बढ़ा दिया गया है।

पंजाब ने माइनिंग नीलामी में किया सुधार, राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य

पंजाब सरकार ने अपने खनन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार की शुरुआत की है, राज्य भर में खनन स्थलों के लिए नई नीलामी शुरू की है और संशोधित पंजाब लघु खनिज नियमों (Amended Punjab Minor Mineral Rules) के तहत नीलामी ढांचे में बड़े सुधारों की अधिसूचना जारी की है। खनन और भूविज्ञान मंत्री वरिंदर कुमार गोयल (Barinder Kumar Goyal) के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि प्राकृतिक संसाधनों से जनता को लाभ हो।
पहले चरण में, 29 वाणिज्यिक खनन स्थलों (Commercial Mining Sites - CMS) की नीलामी एक खुली, प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के माध्यम से की गई। इसके परिणामस्वरूप 16 सफल बोलियां आईं, जिनसे ₹11.61 करोड़ का राजस्व उत्पन्न हुआ। ये नीलामी राज्य द्वारा तीन साल में पहली बार आयोजित की गई हैं। नई प्रणाली पुरानी मात्रा-आधारित (volume-based) नीलामी को प्रतिस्थापित करती है, जिससे अक्सर राजस्व की हानि होती थी और गैर-गंभीर बोलीदाता बढ़ जाते थे।
राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित सुधार देश भर की सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप हैं। नीलामी अब प्रतिस्पर्धी मूल्य बोली (competitive price bidding) पर आधारित होंगी, जिसमें बोलीदाताओं को स्थिर राजस्व के लिए अग्रिम भुगतान (upfront payments) और अग्रिम रॉयल्टी संग्रह (advance royalty collections) के साथ अपनी गंभीरता प्रदर्शित करनी होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने की जिम्मेदारी बोलीदाताओं पर स्थानांतरित कर दी गई है, जिससे संचालन में देरी कम होने की उम्मीद है। सट्टा बोली (speculative bidding) को रोकने के लिए स्पष्ट मृत किराया (dead rent) प्रावधान भी पेश किए गए हैं।
पट्टे की अवधि को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया है, जिससे ऑपरेटरों को अधिक स्थिरता और योजना निश्चितता मिलती है। सरकार ने क्रमिक चरणों में लगभग 100 अतिरिक्त स्थलों की नीलामी की योजना बनाई है। इन नीति संशोधनों और नीलामी सुधारों से सामूहिक रूप से कच्चे माल की कानूनी आपूर्ति का विस्तार होने, परिचालन समय-सीमा में तेजी आने, नियामक स्पष्टता मजबूत होने और एकाधिकार को रोकने और अवैध खनन को रोकने के साथ-साथ सरकारी राजस्व में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।

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