सोने-चांदी में बड़ी गिरावट: मैक्रो दबावों के बीच कीमतों का रीसेट, क्या है आगे की राह?

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AuthorMehul Desai|Published at:
सोने-चांदी में बड़ी गिरावट: मैक्रो दबावों के बीच कीमतों का रीसेट, क्या है आगे की राह?
Overview

आज, 6 फरवरी 2026 को, सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई। यह गिरावट रिकॉर्ड हाई से हुई, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी को लेकर अटकलें और डॉलर की मजबूती रही।

मैक्रो दबावों के कारण कीमतों में रीसेट

ग्लोबल मार्केट से मिले मिले-जुले संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को लेकर बढ़ी अटकलों के कारण सोने और चांदी की कीमतों में आज, 6 फरवरी 2026 को, भारी गिरावट देखी गई। रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद, इन धातुओं के फ्यूचर्स (Futures) में भारी करेक्शन आया। चांदी की कीमत 2.61% घटकर ₹2,37,456 प्रति किलोग्राम पर आ गई, वहीं सोने के फ्यूचर्स ₹1,49,000 से ₹1,55,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार करते दिखे। यह गिरावट तब आई जब सोना ₹1,80,000 से ₹1,81,000 और चांदी अपने रिकॉर्ड हाई ₹4,20,000 के करीब पहुंच गई थी। इस शार्प फॉल (Sharp Fall) का तात्कालिक कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी को लेकर बढ़ी हुई अटकलें हैं, खासकर राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा केविन वार्श जैसे सख़्त रवैये वाले उम्मीदवार को नॉमिनेट किए जाने के बाद। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मजबूती ने लीवरेज्ड अनवाइंडिंग (Leveraged Unwinding) और प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-Booking) को बढ़ावा दिया, जिससे कीमतों में तेज गिरावट आई और मार्केट में अनिश्चितता बढ़ी। वैश्विक स्तर पर, सोना लगभग $4,852 प्रति औंस और चांदी $72 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी, जो समान अंतरराष्ट्रीय दबावों को दर्शाते हैं। यह वोलैटिलिटी (Volatility) बाजार की नीतिगत संकेतों और इन्वेस्टर सेंटीमेंट (Investor Sentiment) में बदलाव के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करती है, खासकर जब कीमतें ऐतिहासिक स्तरों पर पहुंच गई हों।

लंबी अवधि का स्ट्रक्चरल सपोर्ट

हालिया शॉक के बावजूद, सोना और चांदी के लिए फंडामेंटल सपोर्ट (Fundamental Support) मजबूत बना हुआ है, जो एक कंसॉलिडेशन (Consolidation) या रीसेट का संकेत देता है, न कि किसी बड़े ट्रेंड रिवर्सल (Trend Reversal) का। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (Central Banks) अभी भी बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी डॉलर से पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन (Portfolio Diversification) है। अनुमानों के अनुसार, सेंट्रल बैंकों ने 2025 में लगभग 863 टन सोना खरीदा था, और 2026 में भी 800 टन के आसपास खरीद जारी रहने की उम्मीद है। यह लगातार मांग सोने की कीमतों के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है। जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) के अनुसार, 2026 की चौथी तिमाही तक सोने की औसत कीमत $5,055 प्रति औंस रहने का अनुमान है। भू-राजनीतिक तनाव, जो वैश्विक परिदृश्य का एक स्थायी हिस्सा है, सोने की सेफ-हेवन अपील (Safe-haven Appeal) को लगातार बढ़ावा दे रहा है। इसी तरह, चांदी को AI और ग्रीन एनर्जी जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर्स से मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड (Industrial Demand) का फायदा मिल रहा है, जो इसकी कुल खपत का लगभग 50% है और मॉनेटरी पॉलिसी से स्वतंत्र एक बेसलाइन डिमांड (Baseline Demand) प्रदान करता है। बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) के एनालिस्ट्स 2026 में चांदी की औसत कीमत लगभग $56 प्रति औंस और संभावित चरम $65 रहने का अनुमान लगाते हैं। ऐतिहासिक रूप से, कीमतों में करेक्शन की अवधि के बाद अक्सर तब रैलियां देखी गई हैं जब स्पेकुलेटिव फ्रॉथ (Speculative Froth) कम हो जाती है और लंबी अवधि की मांग फिर से हावी हो जाती है।

चांदी और सोने की तुलना और भविष्य का आउटलुक

सोने की तुलना में चांदी का मार्केट कैप (Market Cap) छोटा होने और स्पेकुलेटिव पार्टिसिपेशन (Speculative Participation) अधिक होने के कारण, यह मैक्रो इकोनॉमिक शिफ्ट्स (Macroeconomic Shifts) पर अधिक तीव्र प्रतिक्रिया दिखाती है, जिससे इसकी वोलैटिलिटी (Volatility) बढ़ जाती है। जबकि अप्रैल 2026 के लिए सोने के फ्यूचर्स अनुबंध लगभग ₹1,50,318 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे, मार्च 2026 के लिए चांदी के फ्यूचर्स अनुबंधों में ₹2,33,204 प्रति किलोग्राम पर अधिक तेज गिरावट देखी गई। विश्लेषक दोनों धातुओं के लिए लंबी अवधि के दृष्टिकोण (Outlook) को लेकर आम तौर पर बुलिश (Bullish) बने हुए हैं। जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) का अनुमान है कि सेंट्रल बैंक और निवेशक डाइवर्सिफिकेशन की रणनीतियों के कारण सोना साल के अंत तक $6,300 तक पहुंच सकता है। डॉयचे बैंक (Deutsche Bank) भी साल के अंत तक सोने के लिए $6,000 का अनुमान लगाता है, और उनका मानना है कि यह एक स्थायी रिवर्सल (Reversal) के लिए अनुकूल स्थिति नहीं है। इन उम्मीदों को सेंट्रल बैंक की लगातार खरीदारी और रिटेल निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी से समर्थन मिलता है, जिनसे मांग बढ़ने की उम्मीद है। बाजार फेडरल रिजर्व की पॉलिसी के संकेतों, अमेरिकी डॉलर के मूवमेंट और विकसित हो रही भू-राजनीतिक गतिशीलता के प्रति संवेदनशील बना रहेगा, लेकिन अंतर्निहित स्ट्रक्चरल डिमांड (Underlying Structural Demand) बताती है कि हालिया वोलैटिलिटी कंसॉलिडेशन के लिए एक ठहराव हो सकती है, न कि बुल ट्रेंड का अंत।

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