तेज़ी की मुख्य वजह: Gold-Silver की ज़बरदस्त रिकवरी
कीमती धातुओं (Precious Metals) से जुड़े Exchange-Traded Funds (ETFs) में आज, 9 फरवरी 2026 को एक मज़बूत उछाल देखा गया। यह तेज़ी Gold और Silver की कीमतों में आई ज़बरदस्त रिकवरी का सीधा असर है। हाल के दिनों में बाज़ार में जहां काफी उतार-चढ़ाव और बिकवाली का दबाव था, वहीं आज Silver से जुड़े ETFs ने सबसे ज़्यादा तरक्की की, जो Silver फ्यूचर्स में आई बड़ी उछाल को दर्शाता है। Gold ETFs में भी लगातार बढ़त दर्ज की गई।
यह तेज़ी निवेशकों के लगातार इंटरेस्ट को दिखाती है, खासकर Gold में जो एक मजबूत 'Hedge' यानि बचाव का ज़रिया माना जाता है। भारत में Gold ETFs ने जनवरी 2026 में $2.49 बिलियन का नेट इनफ्लो (Net Inflow) हासिल किया, जो पिछले महीने के मुकाबले करीब 98% ज़्यादा है। यह लगातार 8वां महीना है जब Gold ETFs में इनफ्लो आया है। यह दिखाता है कि निवेशक दुनिया भर की अनिश्चितताओं के बीच Gold को महंगाई से बचाव के लिए एक ज़रूरी एसेट के तौर पर देख रहे हैं।
बाज़ार की चाल और ETFs का प्रदर्शन
Gold फ्यूचर्स, जो अप्रैल डिलीवरी के लिए थे, करीब 2% बढ़कर ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए। वहीं, जून कॉन्ट्रैक्ट्स में भी इसी तरह की तेज़ी दिखी। Silver फ्यूचर्स ने तो और भी मज़बूत चाल पकड़ी, मार्च कॉन्ट्रैक्ट्स करीब 6% उछलकर लगभग ₹2.64 लाख प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहे हैं। Silver की यह मज़बूत चाल उसकी दोहरी भूमिका को दिखाती है - एक तरफ यह एक अहम इंडस्ट्रियल कमोडिटी है, तो दूसरी तरफ यह एक फाइनेंसियल एसेट भी है, जो बाज़ार की भावनाओं और सट्टा (Speculation) पर ज़्यादा तेज़ी से रिएक्ट करता है।
ETFs में भी इसका असर दिखा। UTI Silver ETF 11% से ज़्यादा चढ़ा, जबकि Nippon India Silver ETF (Silver BeES) ने 10% से ज़्यादा की बढ़त दर्ज की। दूसरी ओर, Union Gold ETF और Angel One Gold ETF जैसे Gold ETFs भी 3% से ज़्यादा चढ़े।
बाज़ार में क्यों आया था उतार-चढ़ाव?
कीमती धातुओं के बाज़ार में हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे कई वजहें थीं। Chicago Mercantile Exchange (CME) ग्रुप ने Gold और Silver फ्यूचर्स के लिए मार्जिन रिक्वायरमेंट्स (Margin Requirements) बढ़ा दी थीं, जिससे लेवरेज्ड ट्रेडर्स (Leveraged Traders) को अपने पोजीशन कम करने पड़े। इसका असर बिकवाली के रूप में सामने आया। इसके साथ ही, डॉलर का मज़बूत होना भी Gold की कीमतों पर दबाव डाल रहा था, जो कि फेडरल रिज़र्व के और सख्त होने की उम्मीदों से जुड़ा था। जनवरी की शानदार तेज़ी के बाद, खासकर Silver में, प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-booking) ने भी कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव को बढ़ाया।
Silver की मज़बूती और Gold से तुलना
बाज़ार में आई तेज़ी के बावजूद, Silver 2026 की शुरुआत में सबसे ज़्यादा रिटर्न देने वाली एसेट्स में से एक बनी हुई है, जिसके साल-दर-साल (YTD) रिटर्न लगभग 50-60% हैं। भारत में लॉन्च होने के बाद से, Silver ETFs ने Gold ETFs को प्रदर्शन में काफी पीछे छोड़ा है। जनवरी 2022 से अब तक, Silver ETFs ने लगभग 62% का XIRR (Annualised Return) दिया है, जबकि Gold ETFs ने 42% का XIRR दिया है।
हालांकि, यह मज़बूती ज़्यादा वोलेटिलिटी (Volatility) के साथ आती है। 5 फरवरी 2026 से पहले के दो हफ्तों में, Silver ETFs में औसतन 14.84% की गिरावट आई थी, जबकि Gold ETFs में केवल 0.46% की मामूली गिरावट देखी गई थी। यह दर्शाता है कि Silver बाज़ार की भावनाओं और सट्टा फ्लोज़ (Speculative Flows) के प्रति ज़्यादा संवेदनशील है, जबकि Gold एक ज़्यादा स्थिर 'Hedge' के तौर पर काम कर रहा है।
जोखिम और कमज़ोरियाँ: क्या हैं चिंताएं?
कीमती धातुओं में आई ज़बरदस्त गिरावट, जिसमें Silver ने दशकों का सबसे खराब सिंगल-डे परफॉरमेंस दिखाया, कई बड़े जोखिमों को उजागर करती है। CME की मार्जिन वृद्धि ने दिखाया कि कैसे एक्सचेंज के फैसले लेवरेज्ड पार्टिसिपेंट्स के बीच लिक्विडेशन (Liquidation) की झड़ी लगा सकते हैं। इसके अलावा, कीमतों का तेज़ी से ऊपर जाना, जिसका कुछ हद तक चीन से आए सट्टा कैपिटल (Speculative Capital) ने भी साथ दिया, फिजिकल बाज़ार के सपोर्ट से अलग हो गया था, जिसने एक अस्थिर माहौल तैयार किया। Silver अपनी दोहरी भूमिका के कारण ज़्यादा संवेदनशील है; जहां इंडस्ट्रियल डिमांड इसकी वैल्यू को सपोर्ट करती है, वहीं इसकी ज़्यादा प्राइस वोलेटिलिटी बाज़ार में गिरावट के दौरान नुकसान को बढ़ा देती है। Silver की टिकाऊ रिकवरी के लिए, ETF से होने वाले आउटफ्लो (Outflows) का स्थिर होना ज़रूरी है, क्योंकि फरवरी की शुरुआत से पहले 8 दिनों तक ETF होल्डिंग्स (Holdings) घट रही थीं। WisdomTree Silver 3x Daily Leveraged GBP जैसे लेवरेज्ड Silver ETFs में निवेश, निवेशकों द्वारा लिए जाने वाले ऊंचे जोखिम को दिखाता है, लेकिन यह गंभीर नुकसान की संभावना को भी बढ़ाता है।
आगे क्या? भविष्य का नज़रिया और निवेशकों के लिए सलाह
Gold की कीमतों पर अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, फेडरल रिज़र्व की पॉलिसी उम्मीदें और डॉलर की चाल का असर बना रहेगा। J.P. Morgan का अनुमान है कि 2026 के अंत तक Gold की कीमतें $5,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं, जिसे लगातार मज़बूत निवेशक और सेंट्रल बैंक की मांग का समर्थन मिलेगा। World Gold Council का भी मानना है कि सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और निवेश इनफ्लोज़ (Investment Inflows) ऊंचे स्तर पर बने रहेंगे, जो Gold की 'Safe-Haven' एसेट की भूमिका को मज़बूत करेगा। कुछ विश्लेषक तो लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी डॉलर से इतर डायवर्सिफिकेशन (Diversification) की वजह से 2026 में Gold को $7,000 तक भी पहुंचते देख रहे हैं।
दूसरी ओर, Silver में उसकी इंडस्ट्रियल एक्सपोजर (Industrial Exposure) की वजह से वोलैटिलिटी जारी रहने की संभावना है। मध्यम अवधि में, इंडस्ट्रियल डिमांड, खासकर इलेक्ट्रिफिकेशन (Electrification) ट्रेंड्स से जुड़ी, और फिजिकल बैलेन्स (Physical Balances) का टाइट होना इसके फंडामेंटल्स को सपोर्ट करेगा। हालांकि, इसकी रिकवरी ETF आउटफ्लोज़ के स्थिर होने पर निर्भर करेगी। निवेशक प्रमुख अमेरिकी आर्थिक संकेतकों पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं, जैसे GDP, PMI, नॉन-फार्म पेरोल (Non-farm Payrolls) और महंगाई के आंकड़े, जो फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को आकार देंगे और बुLLion कीमतों को प्रभावित करेंगे।