Pernod Ricard को उम्मीद है कि भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से व्हिस्की पर इंपोर्ट ड्यूटी **150%** से घटकर **40%** हो जाएगी। इससे प्रीमियम स्कॉच सस्ता होगा और कंपनी के प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ेगी। निवेशक इस पॉलिसी बदलाव और राज्यों के टैक्स स्ट्रक्चर पर नजर रख रहे हैं।
भारत-यूके FTA से स्पिरिट्स मार्केट में बड़ा बदलाव?
आने वाले समय में भारत और यूके के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय स्पिरिट्स मार्केट में बड़े बदलाव आ सकते हैं। अभी ब्रिटिश स्पिरिट्स पर 150% तक इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, लेकिन इस एग्रीमेंट के तहत यह धीरे-धीरे कम होकर पहले 75% और अगले 10 सालों में 40% तक पहुंच सकती है। Pernod Ricard, जो भारत में बड़े पैमाने पर काम करती है, इस पॉलिसी के बदलाव का फायदा उठाकर प्रीमियम स्कॉच व्हिस्की को भारतीय ग्राहकों के लिए और सस्ता बनाने की तैयारी में है।
प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस
Pernod Ricard भारत में 'प्रीमियमीकरण' (Premiumization) की स्ट्रैटेजी पर जोर दे रही है, यानी ग्राहकों को महंगे और बेहतर क्वालिटी वाले प्रोडक्ट्स की ओर खींचना। ड्यूटी घटने के बाद कंपनी अपनी लोकल स्तर पर बनने वाली व्हिस्की ब्रांड्स में स्कॉच का इस्तेमाल बढ़ाएगी। इससे ग्राहकों को अच्छी क्वालिटी के साथ-साथ आकर्षक दाम भी मिल सकेंगे। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत में स्पिरिट्स की फाइनल रिटेल कीमत काफी हद तक राज्यों के एक्साइज ड्यूटी और टैक्स पर निर्भर करती है, जो इस फेडरल ट्रेड एग्रीमेंट के दायरे से बाहर हैं। इसलिए, निवेशकों को यह देखना होगा कि राज्य सरकारें इस बदलाव पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं।
भारत में कंपनी की ग्रोथ
भारत Pernod Ricard के लिए एक बेहद अहम बाजार है। यह वॉल्यूम के हिसाब से कंपनी का सबसे बड़ा और वैल्यू के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है। हाल ही में, भारत में कंपनी के रेवेन्यू में 11% की ग्रोथ दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण प्रीमियम ब्रांड्स की मजबूत डिमांड रही। खास बात यह है कि कंपनी की Royal Stag ब्रांड ने 2025 तक 3.26 करोड़ (32.6 million) नौ-लीटर केस की बिक्री का बड़ा आंकड़ा पार कर लिया। यह कंपनी की भारतीय बाजार में मजबूत पकड़ और जटिल रेगुलेटरी माहौल से निपटने की क्षमता को दिखाता है।
जोखिम और चुनौतियां
कंपनी का नजरिया पॉजिटिव है, लेकिन निवेशकों को कुछ बातों पर गौर करना चाहिए। भारत का स्पिरिट्स सेक्टर आए दिन रेगुलेटरी बदलावों और अलग-अलग राज्यों की टैक्स नीतियों के अधीन रहता है, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनी को अनाज और ग्लास जैसी कच्ची सामग्रियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को भी मैनेज करना होगा। ड्यूटी कम होने की स्ट्रैटेजी की सफलता केवल ट्रेड डील के लागू होने पर ही नहीं, बल्कि इस पर भी निर्भर करेगी कि Pernod Ricard कितनी अच्छी तरह से अपने प्रोडक्ट मिक्स को मैनेज कर पाती है और ग्राहकों की बदलती पसंद के साथ तालमेल बिठा पाती है। आने वाले सालों में, कंपनी की लीडरशिप बनाए रखने और इंपोर्टेड स्कॉच को इंटीग्रेट करने की क्षमता एक अहम परफॉरमेंस इंडिकेटर होगी।
