ग्लोबल मार्केट में क्रूड पाम ऑयल की कीमतें 2026 के अंत तक **$1,154** प्रति मीट्रिक टन के निचले स्तर (Floor Price) पर बनी रह सकती हैं। खराब मौसम और बायोफ्यूल की बढ़ती मांग के चलते भारतीय कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सप्लाई और डिमांड का खेल
मलेशियन पाम ऑयल काउंसिल (Malaysian Palm Oil Council) ने अनुमान जताया है कि पाम ऑयल का दाम 4,700 रिंगिट यानी लगभग $1,154 प्रति मीट्रिक टन से नीचे नहीं गिरेगा। इसके पीछे मुख्य वजह दक्षिण-पूर्व एशिया में अल-नीनो का असर है। इंडोनेशिया में बारिश सामान्य से 60% कम रही है, जबकि मलेशिया में यह आंकड़ा 30% तक है। मौसम की इस मार के कारण पाम फ्रूट की पैदावार घटी है, वहीं बायोफ्यूल के लिए बढ़ती मांग ने कीमतों को सपोर्ट दिया है।
भारतीय कंपनियों पर असर
भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का सीधा असर Adani Wilmar, Patanjali Foods और Godrej Agrovet जैसी कंपनियों पर पड़ता है। इन कंपनियों का मार्जिन काफी कम होता है, इसलिए कच्चा माल महंगा होने पर उन्हें लागत बढ़ने या कंज्यूमर पर बोझ डालने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
हालांकि मलेशिया में इन्वेंट्री 8 महीने के ऊपरी स्तर पर है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह केवल मौसमी उछाल है। निवेशकों को अब सरकारी नीति पर नजर रखनी चाहिए। अक्सर जब तेल के दाम बढ़ते हैं, तो सरकार इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव कर महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिश करती है। ऐसे में आने वाली तिमाही के नतीजे यह बताएंगे कि कंपनियां इस उतार-चढ़ाव को कैसे मैनेज कर रही हैं।
