प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गैर-ज़रूरी गोल्ड की खरीदारी टालने की अपील का असर टाइटन कंपनी के शेयरों पर साफ दिख रहा है। इस अपील के चलते शेयर बाजार में टाइटन और अन्य ज्वैलरी स्टॉक्स में 10% तक की बड़ी गिरावट देखी गई, हालांकि अगले दिन ये शेयर 2% नीचे ट्रेड कर रहे थे।
कंपनी के CFO, अशोक सोनथालिया ने माना है कि यह अपील अगले 3 से 6 महीनों तक गोल्ड की मांग को कुछ हद तक कम कर सकती है। लेकिन, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह टाइटन के लिए एक छोटा समय है। कंपनी का फोकस अब कम मुनाफे वाले गोल्ड कॉइन की बिक्री घटाकर, ज्यादा मार्जिन वाले ज्वैलरी बिज़नेस पर बढ़ाने का है। इससे कंपनी के EBITDA मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।
यह सब तब हो रहा है जब टाइटन ने मार्च तिमाही (Q1) में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 35% बढ़कर करीब ₹1,179 करोड़ रहा। वहीं, कुल इनकम (Total Income) 46% बढ़कर लगभग ₹20,300 करोड़ तक पहुंच गई। इस ग्रोथ में टाइटन के ज्वैलरी सेगमेंट का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसमें 50% की शानदार बढ़ोतरी देखी गई।
बढ़ती गोल्ड कीमतों और सरकार की इम्पोर्ट कम करने की कोशिशों के बीच, टाइटन इन दबावों का सामना करने के लिए कई कदम उठा रही है। कंपनी अपने गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम का विस्तार कर रही है, हल्के वजन वाले गहने पेश कर रही है, गोल्ड सेविंग स्कीम्स को बढ़ावा दे रही है और अपने तनिष्क ब्रांड के तहत नए जेमस्टोन ज्वेलरी कलेक्शन भी लॉन्च कर रही है। भारत सोने के इम्पोर्ट पर काफी निर्भर है, ऐसे में ये उपाय करंट अकाउंट डेफिसिट और करेंसी की स्थिरता के लिए अहम हैं।
