Orissa High Court ने Vedanta Ltd की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें कंपनी **2004** के पुराने बॉक्साइट सप्लाई एग्रीमेंट को बहाल करने की मांग कर रही थी। अब कंपनी को लंजिगढ़ रिफाइनरी के लिए मार्केट-लिंक्ड कीमतों पर निर्भर रहना होगा, जिससे मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।
ओडिशा हाई कोर्ट के इस फैसले ने Vedanta Ltd के लिए एक पुराने रास्ते को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। कंपनी Odisha Mining Corporation (OMC) के साथ 2004 के उस एग्रीमेंट को दोबारा लागू करवाना चाहती थी, जिसके जरिए उसे फिक्स्ड रेट पर बॉक्साइट मिल रहा था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि माइनिंग कानूनों में बदलाव के बाद पुराना समझौता अब लागू करने योग्य नहीं है और Vedanta पहले ही बाजार आधारित सप्लाई फ्रेमवर्क का हिस्सा बन चुकी है।
रिफाइनरी की लागत पर असर
Vedanta की लंजिगढ़ एल्युमिना रिफाइनरी के लिए यह एग्रीमेंट पहले एक 'सुरक्षा कवच' की तरह था। अब रिफाइनरी को पूरी तरह से मार्केट प्राइस पर बॉक्साइट खरीदना होगा। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि बॉक्साइट की लागत एल्युमिना प्रोडक्शन में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। कंपनी के पिछले फाइलिंग्स के अनुसार, ओपन मार्केट से मिनरल्स जुटाना काफी महंगा साबित हो रहा है, जिससे ऑपरेशनल लागत में सीधा इजाफा होना तय है।
ऑक्शन-आधारित माइनिंग की चुनौती
कंपनी ने बैकअप प्लान के तौर पर अपनी सब्सिडियरी, Bharat Aluminium Co. Ltd (BALCO) के जरिए हाल ही में ओडिशा का Karlapat बॉक्साइट ब्लॉक हासिल किया है। हालांकि, इस ब्लॉक के लिए कंपनी को 175% का भारी ऑक्शन प्रीमियम चुकाना पड़ा है। यह प्रीमियम बताता है कि मिनरल सिक्योरिटी के लिए कंपनी को भविष्य में कितना भारी-भरकम निवेश करना पड़ेगा।
मार्जिन और भविष्य के जोखिम
कोर्ट के इस आदेश से कंपनी के मार्जिन पर सीधा दबाव दिख रहा है। आने वाली तिमाही नतीजों में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि कंपनी इस बढ़ी हुई लागत को कैसे मैनेज करती है। इसके अलावा, Sijimali प्रोजेक्ट जैसे ऑपरेशंस में फॉरेस्ट क्लीयरेंस और रेगुलरिटी नियम भी कंपनी की राह आसान नहीं होने दे रहे। आने वाले समय में मैनेजमेंट की कमेंट्री यह तय करेगी कि क्या कंपनी अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी से इस घाटे की भरपाई कर पाएगी या निवेशकों को मार्जिन में गिरावट झेलनी होगी।
