देशभर के बाजारों में प्याज की खुदरा कीमतों (Retail prices) में नरमी देखने को मिल रही है। प्रमुख राज्यों से खरीफ की नई फसल की आवक बढ़ने और सरकार द्वारा बफर स्टॉक रिलीज करने से त्योहारी सीजन से पहले सप्लाई बेहतर हुई है।
मंडियों में सुधरी सप्लाई की स्थिति
प्याज की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण प्रमुख उत्पादक राज्यों जैसे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से नई खरीफ फसल का बाजारों में पहुंचना है। इससे सप्लाई और डिमांड के बीच का अंतर काफी कम हो गया है।
मंडियों का हाल और होलसेल रेट्स
इसका असर होलसेल बाजारों में साफ दिख रहा है। महाराष्ट्र की मंडियों में औसत भाव जो सितंबर के मध्य में ₹4,030 प्रति क्विंटल के आसपास थे, वे अब 13% घटकर अक्टूबर की शुरुआत तक ₹3,475 प्रति क्विंटल पर आ गए हैं। इसका असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ा है, जहां 126 शहरों में पिछले 15 दिनों में प्याज की कीमतों में ₹1 से लेकर ₹21 प्रति किलो तक की कमी आई है।
सरकार की तैयारी और लॉजिस्टिक्स
त्योहारी मांग को देखते हुए सरकार ने कीमतों को स्थिर रखने के लिए कमर कस ली है। 'कांदा एक्सप्रेस' (Kanda Express) जैसी विशेष रेल सेवाओं और करीब 500 ट्रकों के जरिए 123 शहरों में बफर स्टॉक की सप्लाई की जा रही है, ताकि जमाखोरी को रोका जा सके।
आगे का आउटलुक (Production Outlook)
साल 2025-26 के लिए कुल उत्पादन का अनुमान 307 लाख टन के आसपास स्थिर है। अच्छी बात यह है कि खरीफ के रकबे में पिछले साल के मुकाबले 5% की बढ़ोतरी हुई है। इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने भी उत्पादक क्षेत्रों में मौसम के अनुकूल रहने का संकेत दिया है, जो फसल की कटाई और ढुलाई के लिए जरूरी है। हालांकि, बाजार अभी भी मौसम और ट्रांसपोर्ट की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है, इसलिए सप्लाई चेन की निरंतरता कीमतों को आगे भी कंट्रोल में रखने के लिए बेहद अहम होगी।
