पर्शियन गल्फ से चीन जाने वाले ऑयल टैंकरों का किराया पहली बार **$1 मिलियन** प्रतिदिन के स्तर को पार कर गया है। स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में सुरक्षा चिंताओं के कारण शिपिंग की लागत में यह ऐतिहासिक उछाल आया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
ऐतिहासिक उछाल और सुरक्षा चुनौतियां
ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री ने एक डरावना मील का पत्थर पार कर लिया है। Baltic Exchange के आंकड़ों के अनुसार, पर्शियन गल्फ से चीन तक कच्चा तेल पहुँचाने का खर्च $1 मिलियन प्रतिदिन से ऊपर निकल गया है। यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी सीधे तौर पर जारी ईरान युद्ध और उससे जुड़ी सैन्य जोखिमों का नतीजा है।
क्यों बढ़ रहा है शिपिंग का खर्च?
संकट की मुख्य वजह 'स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज' से होकर गुजरने वाले टैंकरों की भारी कमी है। बीमा प्रीमियम और सुरक्षा जोखिमों के चलते ऑपरेटर इस रास्ते से बच रहे हैं। यहाँ तक कि गल्फ ऑफ ओमान से तेल भेजने का विकल्प भी अब $644,000 प्रतिदिन का पड़ रहा है।
जब जहाज युद्ध प्रभावित इलाकों से बचने के लिए अफ्रीका का चक्कर लगाकर लंबा रास्ता अपनाते हैं, तो उनकी यात्रा का समय हफ्तों बढ़ जाता है। इसका सीधा असर सक्रिय टैंकर बेड़े की उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो गई है और कीमतें आसमान छू रही हैं।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर असर
कच्चे तेल की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है और Brent Crude सितंबर 2026 में $100 प्रति बैरल के ऊपर टिका हुआ है। हालांकि, रिफाइनिंग मार्जिन फिलहाल इतनी ज्यादा है कि कंपनियां इन महंगे फ्रेट चार्जेस को झेल पा रही हैं। लेकिन, अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक 'हिडन टैक्स' की तरह काम करेगा।
निवेशकों के बीच इस रुझान को लेकर काफी हलचल है। Breakwave Tanker Shipping ETF (BWET) में 2026 की शुरुआत से अब तक लगभग 3,600% की शानदार तेजी देखने को मिली है, जो शिपिंग कैपेसिटी में आ रही रुकावटों के प्रति बाजार का रुख दिखाती है।
आगे क्या होगा?
आने वाले महीनों में सबसे बड़ा खतरा 'रूट वोलेटिलिटी' का है। यदि सुरक्षा कारणों से सुरक्षित रास्ते बंद रहे, तो टैंकरों की कमी बनी रहेगी और फ्रेट रेट्स में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। निवेशकों को फिलहाल रिफाइनिंग मार्जिन और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा स्थिति पर बारीक नजर रखनी चाहिए।
