भू-राजनीतिक टेंशन का मार्केट पर असर: तेल ₹107 पार, सोना-चांदी ETF में दिखी उलट चाल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भू-राजनीतिक टेंशन का मार्केट पर असर: तेल ₹107 पार, सोना-चांदी ETF में दिखी उलट चाल
Overview

सोमवार, **9 मार्च, 2026** को सोना और चांदी ईटीएफ (ETF) में मामूली बढ़त दर्ज की गई, जो कि इन कीमती धातुओं के फ्यूचर्स (Futures) में आ रही गिरावट के बिल्कुल विपरीत था। यह उलटफेर ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया और ब्रेंट क्रूड **$107** प्रति बैरल के पार निकल गया।

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कमोडिटी मार्केट में दिख रही है दोहरी चाल

सोमवार, 9 मार्च, 2026 को गोल्ड (Gold) और सिल्वर (Silver) ईटीएफ (Exchange-Traded Funds) में निवेशकों को कुछ राहत मिली। इन ईटीएफ ने जहां मामूली बढ़त दिखाई, वहीं कीमती धातुओं के फ्यूचर्स (Futures) बाजार में गिरावट का रुख बना रहा। यह दिलचस्प स्थिति ऐसे समय में सामने आई जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने एनर्जी मार्केट में खलबली मचा दी। इस वजह से ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें 20% तक उछलकर $107 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं।

इस दौरान, कई सिल्वर ईटीएफ जैसे DSP Silver ETF, UTI Silver ETF, और Groww Silver ETF में 0.16% से लेकर 0.32% तक की तेजी देखी गई। इसी तरह, Union Gold ETF जैसे गोल्ड ईटीएफ भी 1.3% तक चढ़े। यह सब तब हो रहा था जब मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स 0.87% और सिल्वर फ्यूचर्स 1.3% तक गिर चुके थे। यह अंतर बताता है कि निवेशक ईटीएफ की स्थिरता को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं, भले ही फ्यूचर्स बाजार में दबाव हो।

तेल की कीमतों में आग और महंगाई का डर

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ कीमती धातुओं तक ही सीमित नहीं रहा, इसने एनर्जी मार्केट को भी बुरी तरह प्रभावित किया। ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में करीब 20% का जबरदस्त उछाल आया और यह $107 प्रति बैरल के पार ट्रेड करने लगा। इस तेजी की वजह मध्य पूर्व के बड़े उत्पादकों द्वारा प्रोडक्शन में कटौती और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से शिपिंग को लेकर खतरा बताया जा रहा है। इतिहास गवाह है कि मध्य पूर्व में होने वाले संघर्षों का असर हमेशा तेल की कीमतों पर दिखा है, जिसका नतीजा महंगाई के रूप में सामने आता है।

तेल की कीमतों में यह आग महंगाई की चिंताओं को और बढ़ा रही है, जिससे सेंट्रल बैंकों की मॉनेटरी पॉलिसी पर दबाव आ सकता है। साथ ही, ब्याज दरें जल्द घटने की उम्मीदें भी कम हो सकती हैं, जो ऐतिहासिक रूप से डॉलर को मजबूत कर सकती हैं और सोने पर दबाव डाल सकती हैं। इसके संकेत 8 मार्च, 2026 को यूएस स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स में आई गिरावट से भी मिले, जिससे सोमवार को ब्रॉडर इक्विटी मार्केट की शुरुआत सुस्त रहने की आशंका थी।

एक्सपर्ट्स की सलाह: शॉर्ट-टर्म में रहें सावधान

हालांकि भू-राजनीतिक तनाव आमतौर पर सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों (Safe-Haven Assets) जैसे सोना और चांदी के लिए अच्छा होता है, लेकिन एक्सपर्ट्स थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के डायरेक्टर क्रांथी बथिनी के मुताबिक, सोना और चांदी इस समय 'कंसॉलिडेशन फेज' (Consolidation Phase) में हैं। उन्होंने शॉर्ट-टर्म ईटीएफ निवेश से बचने की सलाह दी है। बथिनी का मानना है कि मीडियम-टर्म निवेशक बेहतर एंट्री पॉइंट्स तलाश सकते हैं।

बावजूद इसके, मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सोना और चांदी की मांग मीडियम-टर्म में मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। इतिहास में भी ऐसे तनावपूर्ण माहौल में सोने ने अच्छी मजबूती दिखाई है। कुछ एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इस तरह की घटनाओं के बाद सोना $200 प्रति औंस तक बढ़ सकता है, लेकिन यह तब संभव होगा जब सप्लाई में वास्तविक रुकावटें आएं, न कि सिर्फ अटकलें लगाई जाएं।

मार्केट की वोलेटिलिटी और आगे का रास्ता

ईटीएफ में भले ही कुछ तेजी दिखी हो, लेकिन अंडरलाइंग मार्केट में जोखिम काफी ज्यादा है। इससे पहले 4 मार्च, 2026 को सिल्वर ईटीएफ में 9% और गोल्ड ईटीएफ में 3-4% तक की बड़ी गिरावट देखी गई थी, जो ग्लोबल बुलियन मार्केट में आई बिकवाली का संकेत था। यह वोलेटिलिटी (Volatility) बताती है कि भू-राजनीतिक घटनाएं भले ही सेफ-हेवन एसेट्स की मांग बढ़ाएं, लेकिन करेंसी मूवमेंट, इंटरेस्ट रेट की उम्मीदें और स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग भी मार्केट को प्रभावित कर सकती है।

इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें घटाने की उम्मीदों का कम होना सोने के लिए एक हेडविंड (Headwind) साबित हो रहा है, भले ही तनाव बढ़ रहा हो। हाल के दिनों में सोने का क्रूड ऑयल से कोरिलेशन (Correlation) भी कमजोर हुआ है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अटकलें सोने की पारंपरिक सेफ-हेवन भूमिका को सीमित कर रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने को $5,000/oz के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। कमोडिटी मार्केट में कुल मिलाकर एक विभाजन (Divergence) दिख रहा है, जहां सोने के दाम बढ़ने की उम्मीद है, वहीं तेल सप्लाई प्रेशर झेल रहा है, जब तक कि भू-राजनीतिक जोखिम सप्लाई-डिमांड को बड़े पैमाने पर न बदल दें। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कमोडिटी मार्केट में सिर्फ भू-राजनीतिक घटनाओं से परे, सप्लाई-डिमांड, मौसम और इकोनॉमिक साइकिल जैसे कई अन्य फैक्टर्स का भी असर होता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.