ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है। वहीं, फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले गोल्ड **$4,000** प्रति औंस के ऊपर टिका हुआ है, जो बाजार में सतर्कता को दर्शाता है।
ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में इन दिनों भारी हलचल है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते एनर्जी और कीमती धातुओं की कीमतों में उथल-पुथल देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत $116 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $101 के ऊपर बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संघर्ष की खबरें सप्लाई चेन बाधित होने का डर पैदा कर रही हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए क्रूड की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय हैं। इससे न केवल भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ता है, बल्कि रुपये पर भी दबाव आता है। क्रूड महंगा होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर मार पड़ती है। निवेशक इन ट्रेंड्स को महंगाई और ब्याज दरों के नजरिए से बारीकी से देख रहे हैं।
गोल्ड का 'सेफ हेवन' स्टेटस
दूसरी तरफ, सोना मजबूती के साथ $4,000 प्रति औंस के स्तर को थामे हुए है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ कनाडा की ब्याज दरों पर फैसलों से पहले निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोने की यह चमक निवेशकों का भरोसा बनाए हुए है।
आगे क्या रखें नजर?
बाजार की नजरें अब केंद्रीय बैंकों की पॉलिसी अपडेट पर हैं। ब्याज दरों में बदलाव से गोल्ड और करेंसी मार्केट पर सीधा असर पड़ेगा। डॉलर-रुपया का उतार-चढ़ाव भारतीय निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटर करने वाला फैक्टर रहेगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर आयात लागत को प्रभावित करता है।
