दुनिया भर के ऑयल रिफाइनर्स (Oil Refiners) इस वक्त रिकॉर्ड मुनाफा कमा रहे हैं। हॉरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई में अचानक आई भारी बढ़ोतरी ने इनकी लागत कम कर दी है। भले ही फ्यूल की डिमांड अभी मजबूत है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह शानदार मार्जिन कुछ ही समय के लिए है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें धीरे-धीरे सामान्य हो सकती हैं।
क्यों हो रही है रिकॉर्ड कमाई?
दुनिया भर के ऑयल रिफाइनर्स (Oil Refiners) एक ऐसी अनोखी बाजार स्थिति का फायदा उठा रहे हैं जिसने रिफाइनिंग प्रॉफिट (Profits) को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इसकी सबसे बड़ी वजह हॉरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई में आया बड़ा बदलाव है। शिपिंग रूट्स के सामान्य होने से, जो तेल पहले रुका हुआ था, वह अब ग्लोबल मार्केट में आ गया है।
आंकड़े बताते हैं कि जून में मध्य पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात बढ़कर 1.235 करोड़ बैरल प्रति दिन हो गया, जो मई में 80 लाख बैरल प्रति दिन से भी काफी ज्यादा है। सप्लाई में इस उछाल से रिफाइनर्स के लिए कच्चे माल की लागत अस्थायी रूप से कम हो गई है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent crude) फ्यूचर्स फिलहाल $70 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।
रिफाइंड प्रोडक्ट्स की डिमांड का असर
कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ने के बावजूद, गैसोलीन (Gasoline) और डीजल (Diesel) जैसे रिफाइंड प्रोडक्ट्स के लिए बाजार अभी भी टाइट है। इस असंतुलन ने रिफाइनिंग प्रॉफिटेबिलिटी के एक प्रमुख मीजर, बेंचमार्क यूएस 3-2-1 क्रैक स्प्रेड (crack spread) को $60 प्रति बैरल से ऊपर धकेल दिया है।
अमेरिका में, पीक समर ड्राइविंग सीजन से पहले कम इन्वेंटरी के कारण, जून की शुरुआत से गैसोलीन रिफाइनिंग मार्जिन 60% से अधिक बढ़कर $56 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। इसी तरह, हालिया ड्रोन हमलों के कारण रूसी डीजल की उपलब्धता कम होने से यूरोपीय डीजल मार्जिन $50 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।
भविष्य और निवेशकों के लिए रिस्क
बाजार के जानकारों का मानना है कि मुनाफे में यह उछाल टिकाऊ नहीं है। एनर्जी मार्केट के सामान्य चक्र में, रिफाइंड फ्यूल्स की ऊंची मांग आखिरकार कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा देती है, क्योंकि रिफाइनर्स कच्चे माल की अपनी खरीद बढ़ाते हैं। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कच्चे तेल की कम लागत और फ्यूल की ऊंची कीमतों के बीच का यह बड़ा अंतर जल्द ही कम होने की संभावना है।
जैसे-जैसे मध्य पूर्व से अस्थायी सप्लाई की अधिकता खत्म होगी, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे मौजूदा रिकॉर्ड रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ग्लोबल सप्लाई और डिमांड के संतुलन में आने के बाद ये मार्जिन ऐतिहासिक औसत पर वापस आ सकते हैं। निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, गैसोलीन और डीजल की इन्वेंटरी की स्थिति, और मध्य पूर्व से एक्सपोर्ट वॉल्यूम को प्रभावित करने वाली भू-राजनीतिक स्थिरता पर नजर रखनी होगी।
