कच्चे तेल में भू-राजनीतिक तनाव का 'तूफान'! 6 महीने की नई ऊंचाई पर पहुंचे दाम

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AuthorMehul Desai|Published at:
कच्चे तेल में भू-राजनीतिक तनाव का 'तूफान'! 6 महीने की नई ऊंचाई पर पहुंचे दाम
Overview

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य तैनाती के कारण कच्चे तेल के दामों में ज़बरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) **$71** के करीब और WTI (WTI) **$66** प्रति बैरल के आसपास पहुँच गया है, जो पिछले **6 महीने** की सबसे बड़ी ऊंचाई है।

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भू-राजनीतिक तनाव का 'गेम'

बाज़ार के जानकारों का कहना है कि इस तेज़ी का मुख्य कारण ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना की बड़ी तैनाती, जो 2003 के बाद से सबसे बड़ी मानी जा रही है, ने बाज़ार में चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री और CIA डायरेक्टर ने भी सांसदों को इस मामले पर जानकारी दी है, जिससे अटकलों का बाज़ार गर्म है।

'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' का डर

इस तेज़ी के पीछे एक बड़ा कारण 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) है। यह दुनिया का एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जिससे सालाना करीब 25% समुद्री तेल का व्यापार होता है। जानकारों का अनुमान है कि इस भू-राजनीतिक जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल $3 से $4 प्रति बैरल का 'रिस्क प्रीमियम' जुड़ गया है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बाधित करने की किसी भी कोशिश या क्षेत्रीय तनाव के बढ़ने का डर बाज़ार पर हावी है, जो मांग और आपूर्ति के असल आंकड़ों को नज़रअंदाज़ कर रहा है।

हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है

हालांकि, भू-राजनीतिक चिंताओं से कीमतें भले ही बढ़ रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत (fundamentals) कुछ और ही कहानी कह रही है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) का अनुमान है कि 2026 तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें औसतन महज़ $58 प्रति बैरल रहेंगी। यह मौजूदा 'रिस्क प्रीमियम' से बिलकुल अलग है।

इसके अलावा, EIA को उम्मीद है कि 2026 में दुनिया भर में तेल की सप्लाई में 31 लाख बैरल प्रतिदिन (3.1 million barrels per day) का बड़ा सरप्लस (surplus) होगा। 2025 में भी 47.7 करोड़ बैरल (477 million barrels) की भारी मात्रा में सप्लाई में बढ़ोतरी का अनुमान है। यह अनुमानित ओवर-सप्लाई (oversupply) बाज़ार के मौजूदा तेज़ी वाले रवैये से बिलकुल उलट है।

कुछ विश्लेषकों ने भू-राजनीतिक प्रीमियम को देखते हुए नज़दीकी अवधि के अनुमानों को थोड़ा बढ़ाया है, लेकिन उनकी भी उम्मीद है कि कीमतें बाद में कम होंगी। उदाहरण के लिए, Morgan Stanley ने अपने नज़दीकी भविष्य के ब्रेंट अनुमानों को ऊपर किया है, लेकिन उनका भी मानना है कि साल के अंत तक कीमतें $60 तक गिर सकती हैं।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि ExxonMobil और Chevron जैसी एनर्जी कंपनियों के शेयर साल 2026 की शुरुआत से 22% से ज़्यादा बढ़ चुके हैं। लेकिन यह तेज़ी तेल की कीमतों पर भरोसा दिखाने से ज़्यादा 'रियल इकोनॉमी' एसेट्स में निवेश के रुझान को दर्शाती है।

कहीं 'डर' की वजह से तो नहीं बढ़ रहीं कीमतें?

यह स्थिति बताती है कि बाज़ार 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' में सप्लाई बाधित होने के संभावित खतरे को ज़्यादा महत्व दे रहा है, जबकि जमीनी आंकड़े (fundamental data) इस बात का समर्थन नहीं करते। इतिहास गवाह है कि ऐसी स्थितियों में कीमतें बढ़ी भी हैं और गिरी भी हैं। कई विश्लेषक यह भी मानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच बड़े क्षेत्रीय तनाव की संभावना कम है, और इसलिए सप्लाई में बड़ी रुकावटें नज़दीक के भविष्य में शायद न आएं।

ईरान की अपनी तेल निर्यात क्षमता, जिस पर प्रतिबंध भी लगे हुए हैं, करीब 13 से 15 लाख बैरल प्रतिदिन (1.3-1.5 million barrels per day) है। यह उस स्तर से काफी कम है जो बाज़ार में स्थायी कमी (shortage) की कहानी को सही ठहरा सके। इसके अलावा, OPEC+ के पास ज़रूरत पड़ने पर उत्पादन बढ़ाने की काफी क्षमता है।

2026 के लिए अनुमानित भारी ओवर-सप्लाई और EIA का मंदी वाला (bearish) मूल्य अनुमान, यह दर्शाता है कि मौजूदा तेज़ी कहीं 'डर' या अटकलों (speculation) का नतीजा तो नहीं है, न कि बाज़ार की मज़बूत फंडामेंटल्स का।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.