सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। क्रूड ऑयल **$107** प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे दुनिया भर में सप्लाई चेन बाधित होने और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
सप्लाई चेन पर बड़ा संकट
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के बंद होने से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल तेज हो गई है। यह पाइपलाइन सऊदी तेल निर्यात के लिए एक मुख्य जरिया है। फिलहाल Brent Crude $107 प्रति बैरल और WTI क्रूड $103 के आसपास ट्रेड कर रहा है। माना जा रहा है कि इस हमले के कारण दुनिया की कुल सप्लाई का लगभग 4% यानी करीब 40 लाख बैरल प्रतिदिन का नुकसान हो सकता है। पाइपलाइन की मरम्मत में 3 से 6 हफ्ते का समय लग सकता है, जो बाजार के लिए एक बड़ी चिंता है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कीमतों में यह उछाल हमारे इंपोर्ट बिल (Import Bill) को सीधा प्रभावित करेगा। मार्केट एक्सपर्ट्स की नजरें अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर टिकी हैं।
- मार्जिन पर दबाव: अगर कंपनियां कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनके मुनाफे पर बुरा असर पड़ सकता है।
- महंगाई का जोखिम: कच्चे तेल की ऊंची कीमतें देश में महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकती हैं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट खराब होने का डर है।
- रिस्क प्रीमियम: बाजार फिलहाल 'रिस्क प्रीमियम' जोड़कर चल रहा है, जिसका मतलब है कि सप्लाई सामान्य होने तक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
अब निवेशकों को सऊदी अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी और पाइपलाइन रिपेयर की समय-सीमा पर कड़ी नजर रखनी होगी, क्योंकि मिडिल ईस्ट का जियो-पॉलिटिकल तनाव आने वाले दिनों में एनर्जी प्राइसेज में वोलाटिलिटी (Volatility) को बनाए रख सकता है।
