US-Iran तनाव कम होने के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका के नवंबर मिडटर्म इलेक्शन से पहले हमले न करने के वादे से बाजार को राहत मिली है, जो भारत के लिए एक पॉजिटिव संकेत है।
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में नरमी देखी गई। Brent Crude $103.53 प्रति बैरल पर सेटल हुआ, जबकि WTI Crude गिरकर $90.97 पर आ गया। इस गिरावट की मुख्य वजह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने साफ किया कि 3 नवंबर के मिडटर्म इलेक्शन से पहले अमेरिका ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेगा। इससे 'होरमुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में सप्लाई रुकने का डर कम हो गया है।\n\n### भारतीय बाजार पर असर\nभारत एक बड़ा एनर्जी इम्पोर्टर देश है, इसलिए क्रूड की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा हमारे इम्पोर्ट बिल और ट्रेड डेफिसिट को मिलता है। इससे भारतीय रुपया भी स्थिर रहता है। ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और ओएमसी (OMCs) कंपनियों के मार्जिन पर पड़ने वाला दबाव इस गिरावट से कम हो सकता है।\n\n### Hurricane Isaias का संकट\nहालांकि कीमतों में राहत है, लेकिन ग्लोबल सप्लाई अभी भी अस्थिर है। 'हैरिकेन इसायास' (Hurricane Isaias) के कारण मेक्सिको की खाड़ी में लगभग 13 लाख बैरल प्रति दिन का प्रोडक्शन रुक गया है, जो वहां के कुल उत्पादन का करीब 63% है। यह बड़ी सप्लाई कमी कीमतों को एक निश्चित लेवल से नीचे गिरने से रोक रही है।\n\n### आगे की राह\nअमेरिका ने हाल ही में ईरान के क्रूड ट्रांसपोर्ट से जुड़ी 17 वेसल्स (जहाजों) पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जो संकेत देते हैं कि आर्थिक दबाव की रणनीति जारी रहेगी। निवेशकों को अब दो चीजों पर नजर रखनी चाहिए: मेक्सिको की खाड़ी में प्रोडक्शन कब तक बहाल होता है और भारत का ट्रेड डेटा क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
