28 अगस्त 2026 को Crude Oil की कीमतें गिरकर पिछले दो हफ्तों की तेजी से बाहर निकल गई हैं, जबकि Gold अभी भी **$4,600** प्रति औंस के करीब मजबूत बना हुआ है।
ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को निवेशकों का मूड बदलता दिखा। एनर्जी प्राइसेज में सुस्ती आई है, जबकि प्रीशियस मेटल्स अपनी जगह बनाए हुए हैं। Brent Crude फ्यूचर्स गिरकर $89.45 प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि WTI Crude $83.31 पर ट्रेड कर रहा है। यह गिरावट ऑयल के लिए एक बड़ा साप्ताहिक करेक्शन है, जिसने पिछले दो हफ्तों की तेजी को थाम दिया है।
कमोडिटी ट्रेंड्स के पीछे की वजह
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के बावजूद ऑयल की कीमतों में यह गिरावट प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-booking) का नतीजा है। Brent और WTI दोनों में 4% से ज्यादा की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई है। निवेशक अब ग्लोबल इकोनॉमिक डिमांड और सप्लाई की चिंताओं के बीच अपने पोर्टफोलियो को री-कैलिब्रेट कर रहे हैं।
वहीं, Gold का भाव $4,600 प्रति औंस के स्तर के पास टिका हुआ है। निवेशक इसे 'सेफ-हेवन' एसेट मानकर इसमें पैसा लगा रहे हैं, जिसे 'डिबेसमेंट ट्रेड' (Debasement trade) कहा जा रहा है। अमेरिकी फिस्कल पॉलिसी में अस्थिरता और कर्ज बढ़ने के डर से गोल्ड की यह चमक दशकों में सबसे बेहतरीन मासिक परफॉरमेंस की ओर बढ़ रही है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है मायने?
भारत के लिए क्रूड ऑयल की कीमतें बेहद अहम हैं क्योंकि हम अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करते हैं। ऑयल के दाम कम होने से भारत का इम्पोर्ट बिल कम हो सकता है और इन्फ्लेशन (Inflation) पर लगाम लग सकती है। हालांकि, यह अस्थिरता उन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है जो ट्रांसपोर्ट और एनर्जी पर निर्भर हैं। साथ ही, डॉलर की मजबूती और FII के फ्लो पर भी निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं, जो Sensex और Nifty की चाल तय करते हैं।
आगे की राह
अब निवेशकों की नजरें Jackson Hole संगोष्ठी में फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के संबोधन पर टिकी हैं। बाजार को ब्याज दरों (Interest rates) को लेकर स्पष्ट संकेतों का इंतजार है। अगर 'हॉकिश' संकेत मिलते हैं, तो गोल्ड और लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है। मिडिल ईस्ट में किसी भी कूटनीतिक बदलाव पर भी नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यह सप्लाई चेन के समीकरण तुरंत बदल सकता है।
