मिडिल ईस्ट में सप्लाई रिस्क के कारण Brent crude **0.78%** उछलकर **$109.64** प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के बीच सोना **$4,115** प्रति औंस के आसपास स्थिर बना हुआ है।
मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक (geopolitical) तनाव फिर से गहराने के कारण बुधवार को ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। Brent crude के भाव 0.78% बढ़कर $109.64 प्रति बैरल पर पहुंच गए, जबकि WTI crude भी 76 सेंट की मजबूती के साथ $98.58 पर बंद हुआ। इस तेजी की मुख्य वजह सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित खतरे और रेड सी (Red Sea) शिपिंग रूट से जुड़ी चिंताएं हैं।
भारतीय निवेशकों पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल के दाम बढ़ना सीधे तौर पर देश के इंपोर्ट बिल पर दबाव डालता है। इसका असर उन सेक्टर्स की कंपनियों पर पड़ता है जहां फ्यूल एक बड़ा खर्च है, जैसे कि एविएशन, पेंट्स और लॉजिस्टिक्स। इसके अलावा, तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू महंगाई दर को भी प्रभावित कर सकती हैं, जिस पर बाजार की पैनी नजर है।
सोने की सुस्त चाल
सोना $4,115 प्रति औंस के स्तर पर टिका हुआ है। आमतौर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता में सोना तेजी दिखाता है, लेकिन इस बार अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर जारी अनिश्चितता और महंगाई के डेटा ने इसकी चमक को फीका कर दिया है।
डॉलर और अन्य संकेत
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.78 के करीब है, जो तीन सप्ताह के निचले स्तरों के आसपास बना हुआ है। डॉलर में कमजोरी से भारतीय रुपये को थोड़ा सहारा मिल सकता है, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें इस फायदे को कम कर देती हैं। आगे चलकर रेड सी की स्थिति और अमेरिकी आर्थिक डेटा यह तय करेंगे कि कमोडिटी बाजार किस ओर रुख करता है।
