कच्चे तेल में तेज़ी, सोने में मजबूती जारी: जानें क्या है वजह

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AuthorNeha Patil|Published at:
कच्चे तेल में तेज़ी, सोने में मजबूती जारी: जानें क्या है वजह

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला। इसके पीछे की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी चिंता है। वहीं, अमेरिकी डॉलर में नरमी और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बीच सोना भी अपनी बढ़त बनाए हुए है। ये कमोडिटी बाज़ार की हलचलें भू-राजनीतिक जोखिमों और अमेरिकी आर्थिक नीतियों को लेकर निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती हैं।

कच्चे तेल में क्यों आई तेज़ी?

वैश्विक कमोडिटी बाज़ारों में सोमवार को हलचल दिखी, जहाँ कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी दर्ज की गई। इस उछाल का मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ी हुई अनिश्चितता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, और इसमें किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा पैदा करती है। हालांकि ईरान और ओमान के बीच समुद्री समझौतों की खबरें हैं, लेकिन अमेरिका से जुड़े खास शर्तों ने बाज़ार में चिंता बढ़ा दी है।

Brent और WTI में उछाल

Brent क्रूड फ्यूचर्स 1% से ज़्यादा बढ़कर $84 प्रति बैरल के पार चला गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स भी $79 प्रति बैरल के करीब पहुंच गए। इन कीमतों में यह अस्थिरता इसलिए है क्योंकि संबंधित पक्षों के बीच कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला है। इससे निवेशकों को डर है कि यह महत्वपूर्ण शिपिंग लेन संघर्ष का बिंदु बनी रह सकती है, न कि व्यापार के लिए खुली।

सोने की कीमतों में स्थिरता

जहां तेल की कीमतों पर भू-राजनीतिक खबरों का असर दिखा, वहीं सोना अपनी कीमत बनाए हुए है। जनवरी के बाद अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त के बाद, कीमती धातु अब स्थिर हो गई है। सोने को कई बाज़ार कारकों का फायदा मिल रहा है। अमेरिका के हालिया आर्थिक आंकड़ों, खासकर उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट ने भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को बढ़ाया है। जब ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदें कम होती हैं, तो सोना जैसी नॉन-यील्डिंग संपत्तियां निवेशकों के लिए ज़्यादा आकर्षक हो जाती हैं।

इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर में भी नरमी के संकेत मिले हैं, जो प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले दो महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। चूंकि सोना डॉलर में तय होता है, इसलिए कमजोर मुद्रा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए इसे सस्ता बनाती है, जिससे इसकी कीमत को सहारा मिलता है।

निवेशकों के लिए क्या है अहम?

इन बाज़ार गतिविधियों से निवेशकों के लिए भू-राजनीतिक जोखिम और केंद्रीय बैंक की नीतियों का संपत्ति की कीमतों पर दोहरा असर साफ होता है। अगर ऊर्जा की ऊंची कीमतें बनी रहती हैं, तो यह महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिसे केंद्रीय बैंकों को संभालना होगा। वहीं, सोने में हालिया मजबूती अनिश्चित आर्थिक माहौल पर व्यापारियों की प्रतिक्रिया को दर्शाती है।

आने वाले दिनों में अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़े सबसे अहम होंगे, जो फेडरल रिजर्व के भविष्य के नीतिगत फैसलों पर ज़्यादा स्पष्टता दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से संबंधित कोई भी राजनयिक या सैन्य अपडेट ऊर्जा बाज़ारों में तुरंत अस्थिरता पैदा कर सकता है। निवेशक कमोडिटी क्षेत्र में आगे की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना का अंदाज़ा लगाने के लिए इन विकासों पर करीब से नज़र रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.