अमेरिका की तरफ से ईरान पर संभावित नौसैनिक नाकाबंदी की चेतावनी के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आया है। बीते हफ्ते के मुकाबले इसमें **4%** से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है। hormuz की खाड़ी में दो टैंकरों पर हुए हमले के बाद से सप्लाई बाधित होने का डर बढ़ गया है, जिसका असर अब सीधे निवेशकों पर पड़ रहा है।
लगातार बढ़ रही हैं तेल की कीमतें
इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $87.19 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि WTI क्रूड (WTI Crude) $81.75 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इस उछाल की मुख्य वजह ईरान को लेकर अमेरिका का कड़ा रुख और नौसैनिक नाकाबंदी की चेतावनी है। इससे ऊर्जा सप्लाई के सुरक्षित रास्तों, खासकर hormuz की खाड़ी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
hormuz की खाड़ी पर मंडराया खतरा
hormuz की खाड़ी दुनिया भर में तेल और एलएनजी (LNG) सप्लाई का एक अहम जरिया है, जहाँ से लगभग पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है। ऐसे में, 13 अगस्त, 2026 को ADNOC (Abu Dhabi National Oil Company) से जुड़े दो जहाजों पर हुए हमले की खबर ने बाज़ार को और डरा दिया है। हालांकि, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि इस इलाके में जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा है। इसके चलते इस रूट से जहाजों की आवाजाही में कमी आई है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। ऐसे में, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर देश के आयात बिल को बढ़ाती हैं और चालू खाते (Current Account) पर दबाव डाल सकती हैं।
तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे Indian Oil, BPCL और HPCL के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि अगर रिटेल फ्यूल की कीमतें नहीं बढ़ाई गईं तो उनके मार्जिन पर असर पड़ सकता है। वहीं, ONGC और Oil India जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को बढ़ती कीमतों से फायदा हो सकता है। लेकिन, सबसे बड़ी चिंता इंपोर्टेड महंगाई (Imported Inflation) की है, जिसका असर ब्याज दरों और बाज़ार की सेंटिमेंट पर पड़ सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
बाज़ार की नज़रें अगले हफ्ते अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट (Scott Bessent) के ऐलान पर टिकी हैं, जिनके ईरान पर नए और अभूतपूर्व आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा करने की उम्मीद है। इससे इस भू-राजनीतिक तनाव की अवधि और गंभीरता का अंदाज़ा लगेगा।
इन सब के अलावा, निवेशक कच्चे तेल के स्टॉक (Inventory) और OPEC की डिमांड फोरकास्ट पर भी नज़र रख रहे हैं। हाल के हफ्तों में अमेरिकी क्रूड इन्वेंटरी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन hormuz की खाड़ी से सप्लाई बाधित होने का डर इन आंकड़ों पर भारी पड़ रहा है। तेल की मौजूदा कीमतें बनी रहेंगी या नहीं, यह hormuz की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही के सामान्य होने या फिर इस संघर्ष के और बढ़ने पर निर्भर करेगा।
