क्यों गिरी तेल की कीमतें?
यह डील, जो पाकिस्तान की मदद से हुई है, अगर सफल रही तो प्रमुख ऊर्जा सप्लाई रूट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने की उम्मीद है। इस रूट से दुनिया भर का लगभग 25% समुद्री तेल व्यापार होता है। इस खबर का सीधा असर क्रूड ऑयल पर हुआ। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स एक ही दिन में 19% तक गिर गए और $95 प्रति बैरल के आसपास आ गए। ब्रेंट क्रूड भी $95.96 प्रति बैरल पर आ गया, जो हाल के हफ्तों में $110 के पार चला गया था।
मार्केट में आई बहार
इस खबर से ग्लोबल मार्केट में मानो बहार आ गई। S&P 500 फ्यूचर्स 2% से ज़्यादा चढ़ गए। यूरोपीय मार्केट्स 4% से ज़्यादा बढ़े। एशिया में जापान का Nikkei 225 इंडेक्स करीब 5% और दक्षिण कोरिया का Kospi 6% उछल गया, जिस वजह से कुछ जगहों पर ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। MSCI का एशिया-पैसेफिक इंडेक्स (जापान को छोड़कर) भी करीब 4% बढ़ा। यह तेजी फरवरी के अंत से भू-राजनीतिक तनावों के कारण मार्केट में जो डर बैठा था, उसे कम करती है। तेल की कीमतों में यह भारी गिरावट महंगाई को कम कर सकती है और US फेडरल रिजर्व जैसे सेंट्रल बैंकों से ब्याज दरें कम होने की उम्मीदें बढ़ा सकती है। इसका असर US ट्रेजरी यील्ड्स पर भी दिखा, जहां 10-साल की यील्ड 4.25% के आसपास आ गई।
नाजुक सीजफायर और भारत की चिंताएं
यह दो-हफ्ते का सीजफायर ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से खोलने की उसकी प्रतिबद्धता पर निर्भर करता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह डील अस्थायी और सशर्त है, इसलिए मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। भारत, जो अपनी 90% से ज़्यादा कच्चा तेल ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, के लिए यह स्थिति मिली-जुली है। एक तरफ जहां तेल सस्ता होने से राहत मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ सप्लाई चेन की रुकावटों का असर GDP ग्रोथ और महंगाई पर पड़ सकता है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.8% से घटकर 6% हो सकता है, और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) फाइनेंशियल ईयर 2027 तक बढ़कर 4.8% तक जा सकता है। आज, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) से ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25% पर स्थिर रखने की उम्मीद है, ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता बनी रहे।
मंडराता खतरा
हालांकि मार्केट अभी राहत महसूस कर रहा है, पर खतरे अभी टले नहीं हैं। यह सीजफायर एक छोटी अवधि का समाधान है, और भविष्य अनिश्चित है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के वादे का पालन कराना अहम होगा। तेल बाज़ार की नाजुक स्थिति को देखते हुए, अगर तेहरान (ईरान) पीछे हटता है, तो सप्लाई की दिक्कतें फिर से बढ़ सकती हैं।