US में क्रूड इन्वेंट्री बढ़ने से तेल की कीमतों में हल्की गिरावट आई है, जिससे ग्लोबल मार्केट को थोड़ी राहत मिली है। वहीं, सोने की चाल Federal Reserve के आज आने वाले पॉलिसी फैसले पर टिकी है, जिसका सीधा असर भारतीय निवेशकों, रुपये की वैल्यू और महंगाई पर पड़ेगा।
ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में 16 सितंबर, 2026 को काफी सतर्कता देखी जा रही है। एक तरफ एनर्जी मार्केट में नरमी है, तो दूसरी तरफ बढ़ती ब्याज दरों का दबाव बना हुआ है। US में क्रूड ऑयल इन्वेंट्री उम्मीद से ज्यादा बढ़ी है, जिससे कीमतों में मामूली गिरावट आई है। हालांकि, मिडिल ईस्ट में सप्लाई चेन की समस्याओं, खास तौर पर सऊदी अरब की एक बड़ी पाइपलाइन के बंद होने की खबरों के चलते कीमतें अभी भी $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है?
भारत क्रूड ऑयल का एक बड़ा आयातक (Importer) है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतें हमारे इंपोर्ट बिल को बढ़ा देती हैं, जिसका सीधा असर रुपये की मजबूती और उन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ता है जो ईंधन का अधिक इस्तेमाल करती हैं।
गोल्ड पर फेड के फैसले का असर
सोने की कीमतें $4,282 प्रति औंस के आसपास सुस्त पड़ी हैं। मार्केट में 92% संभावना है कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर में बढ़ोतरी करेंगे। फिलहाल US ट्रेजरी यील्ड 5% के तीन साल के हाई लेवल पर है, जिससे सोना निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो गया है।
जब US में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित US एसेट्स में लगाने लगते हैं। इसका असर भारत में आने वाले विदेशी निवेश (FII) की रफ्तार पर पड़ता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका बनी रहती है। अब निवेशकों की नजर फेड के आधिकारिक बयान और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़ी जियो-पॉलिटिकल खबरों पर है, जो कमोडिटी और इक्विटी मार्केट की अगली चाल तय करेंगे।
