ईरान द्वारा शांति वार्ता के लिए रजामंदी जताने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में **6%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारत जैसे बड़े एनर्जी इम्पोर्टर के लिए यह खबर काफी राहत भरी है, जिससे महंगाई और ट्रेड डेफिसिट पर लगाम लग सकती है।
क्रूड में बड़ी गिरावट
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent crude futures) गिरकर $106.65 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (U.S. WTI) घटकर $97.75 प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह गिरावट तब आई जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने घोषणा की कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमेनेई ने औपचारिक शांति वार्ता शुरू करने की मंजूरी दे दी है। कतरी मध्यस्थों के जरिए हो रही यह बातचीत उन एनर्जी मार्केट्स के लिए बड़ी राहत है, जो पिछले कई हफ्तों से भारी अस्थिरता से जूझ रहे थे।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कीमतों में नरमी भारत के लिए किसी बड़े बूस्टर से कम नहीं है। इससे न केवल देश का इम्पोर्ट बिल घटेगा, बल्कि डोमेस्टिक महंगाई और रुपये की चाल को स्थिर रखने में भी मदद मिलेगी।
किन सेक्टरों को होगा फायदा?
ईंधन की कीमतों के प्रति संवेदनशील सेक्टर जैसे ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, पेंट्स और एविएशन के लिए यह खबर काफी अहम है। Indian Oil, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों के इनपुट कॉस्ट में कमी आ सकती है। वहीं, एयरलाइंस के लिए भी जेट फ्यूल का खर्च घटने से मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए सावधानी
हालांकि कीमतों में यह कमी आई है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स अभी भी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील इलाकों में सप्लाई को लेकर बना 'रिस्क प्रीमियम' अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यदि शांति वार्ता बेपटरी होती है या तनाव फिर से बढ़ता है, तो कीमतों में तेज उछाल दोबारा देखने को मिल सकता है। निवेशकों को आने वाले दिनों में डिप्लोमैटिक अपडेट्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
