ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी जा रही है। अमेरिका में मिड-टर्म चुनावों के नतीजों के इंतजार में निवेशक सतर्क हैं, जिसके चलते तेल के दाम फिसल गए हैं, जबकि क्रूड इन्वेंट्री में गिरावट हैरान करने वाली है।
ग्लोबल ऑयल मार्केट्स में बुधवार को सुस्ती का माहौल रहा। Brent crude फ्यूचर्स गिरकर $103.34 पर आ गए, जबकि WTI क्रूड $95.56 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका में चल रहे मिड-टर्म चुनाव हैं। मार्केट को इस बात की चिंता है कि कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण होगा, क्योंकि इसका सीधा असर अमेरिका की फॉरेन पॉलिसी और मध्य पूर्व (Middle East) के साथ संबंधों पर पड़ेगा।
इन्वेंट्री डेटा और मार्केट का मूड
दिलचस्प बात यह है कि सप्लाई डेटा और कीमतों में एक बड़ा अंतर दिख रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्री में 5.27 मिलियन बैरल की गिरावट आई है। यह आंकड़ा उम्मीदों से बिल्कुल उलट है, क्योंकि एक्सपर्ट्स को 880,000 बैरल की बढ़ोतरी की उम्मीद थी। आमतौर पर ऐसी कमी कीमतों को ऊपर ले जाती है, लेकिन अभी मार्केट सप्लाई से ज्यादा चुनावी नतीजों और जियोपॉलिटिकल तनाव पर नजरें गड़ाए हुए है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए भारी इंपोर्ट पर निर्भर है, इसलिए क्रूड में उतार-चढ़ाव सीधे हमारे मार्केट और रुपये की चाल को प्रभावित करता है। तेल की कीमतों में अस्थिरता से Current Account Deficit और महंगाई पर दबाव बनता है, जिससे Reserve Bank of India (RBI) के इंटरेस्ट रेट फैसलों पर भी असर पड़ता है।
सेक्टर के लिहाज से देखें तो:
- OMCs (Indian Oil Corporation, BPCL, HPCL): तेल की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव इनके मार्जिन पर दबाव डालता है, क्योंकि हर बार कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डालना मुमकिन नहीं होता।
- Upstream कंपनियाँ (ONGC, Oil India): इन्हें कच्चे तेल की रियलाइज्ड प्राइस का सीधा फायदा मिलता है।
आगे क्या देखें?
मार्केट अब US Energy Information Administration (EIA) की ऑफिशियल रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जो आज जारी होगी। साथ ही, अमेरिकी वोटों की गिनती के अपडेट्स पर भी नजर रखें, क्योंकि यही ग्लोबल सप्लाई चेन का भविष्य तय करेंगे।
