रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। वहीं, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें न बढ़ाने के संकेतों के चलते सोने की कीमतों में उछाल देखा गया है, जो भारतीय निवेशकों के लिए अहम संकेत हैं।
सोमवार को ग्लोबल कमोडिटी बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.30% गिरकर $108.43 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.52% फिसलकर $100.88 पर बंद हुआ। यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि मार्केट को उम्मीद है कि रूस पर प्रतिबंधों में मिली छूट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में फ्यूल की सप्लाई बढ़ेगी।
भारतीय मार्केट पर असर
भारतीय निवेशकों के लिए यह एक राहत भरी खबर हो सकती है। चूंकि भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से देश के ट्रेड डेफिसिट और महंगाई पर दबाव कम हो सकता है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों के लिए रिफाइनिंग लागत कम होने से मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।
गोल्ड और फेडरल रिजर्व का रुख
एक तरफ जहां एनर्जी सेक्टर सुस्त रहा, वहीं सोने में तेजी दिखी। इसका मुख्य कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं का कम होना है। आंकड़ों के मुताबिक, फेड की अगली मीटिंग में ब्याज दर में 0.25% बढ़ोतरी की संभावना घटकर 20% से भी कम रह गई है। फेड चेयर केविन वॉर्श की हालिया टिप्पणी को बाजार ने संकेत के रूप में लिया है कि सेंट्रल बैंक फिलहाल मौजूदा दरों को बरकरार रख सकता है।
करेंसी का दबाव
ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.83 पर स्थिर बना हुआ है। फ्रांस में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण यूरो पर दबाव है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ है। भारतीय बाजार के लिए यह एक पेचीदा स्थिति है; क्योंकि अगर डॉलर और मजबूत होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का फायदा रुपये की कमजोरी की वजह से कम हो सकता है। आने वाले हफ्तों में रूसी सप्लाई की हकीकत और फेड की पॉलिसी ही मार्केट की दिशा तय करेगी।
