हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की स्थिर सप्लाई के कारण ग्लोबल मार्केट में कीमतें **10% से 15%** तक गिर सकती हैं। वहीं, अमेरिका द्वारा डीजल निर्यात पर संभावित प्रतिबंध से वैश्विक स्तर पर सप्लाई गैप बन सकता है, जिसका सीधा फायदा भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को मिलने की उम्मीद है।
ग्लोबल मार्केट में राहत के संकेत
क्रूड ऑयल मार्केट में अब स्थिरता के संकेत दिख रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह 10 मिलियन बैरल प्रति दिन के स्तर को पार कर गया है। इससे मार्केट का वह रिस्क प्रीमियम कम होता दिख रहा है, जिसने ब्रेंट क्रूड को $120 प्रति बैरल के आसपास टिकाए रखा था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सप्लाई चेन ऐसे ही चलती रही, तो कीमतों में 10% से 15% की गिरावट देखने को मिल सकती है।
डीजल मार्केट का संकट और अमेरिका का रुख
कच्चे तेल की सप्लाई तो सुधर रही है, लेकिन रिफाइंड प्रोडक्ट्स जैसे डीजल का संकट बरकरार है। रूस और सऊदी अरब जैसे बड़े उत्पादकों की रिफाइनिंग क्षमता में 3.5 से 4 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आई है। अमेरिका में अपने घरेलू बाजार में बढ़ती महंगाई को कम करने के लिए सरकार अब डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है।
भारतीय कंपनियों के लिए क्या हैं अवसर?
यह पॉलिसी बदलाव भारतीय रिफाइनर्स के लिए एक बड़ा मौका बन सकता है। भारत ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में करीब 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रिफाइंड प्रोडक्ट्स का निर्यात किया था। अगर अमेरिका निर्यात पर रोक लगाता है, तो ग्लोबल मार्केट में पैदा हुए सप्लाई वैक्यूम को भरने के लिए भारतीय कंपनियां यूरोप और दक्षिण अमेरिका के बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर सकती हैं, जिससे उनके एक्सपोर्ट मार्जिन में सुधार की संभावना है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालाँकि, यह खबर सकारात्मक है, लेकिन ग्लोबल एनर्जी मार्केट अभी भी बेहद संवेदनशील है। भू-राजनीतिक तनाव में कोई भी अचानक उछाल इस स्थिरता को बिगाड़ सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे अमेरिका की एक्सपोर्ट पॉलिसी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की गतिविधियों पर बारीक नजर रखें, क्योंकि यही फैक्टर्स आगे चलकर भारतीय एनर्जी सेक्टर की चाल तय करेंगे।
