29 अक्टूबर को ग्लोबल मार्केट में Crude Oil और Gold की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में तनाव घटने और US Federal Reserve के फैसलों के बीच भारतीय निवेशकों के लिए कच्चे तेल की गिरती कीमतें एक राहत की खबर हैं, हालांकि मजबूत डॉलर ने रुपये पर नया दबाव बना दिया है।
ग्लोबल कमोडिटी बाजार का रुख\n\n29 अक्टूबर को ग्लोबल कमोडिटी बाजार में नरमी का माहौल रहा। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें $114 प्रति बैरल की ओर झुकीं, वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग $102 प्रति बैरल के पास कारोबार करता दिखा। इसकी मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में डिप्लोमैटिक प्रयासों के जरिए तनाव को कम करना है, जिसने पहले सप्लाई से जुड़ी चिंताओं को बढ़ा रखा था।\n\n### भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर\n\nभारत के लिए क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट एक बड़ा पॉजिटिव ट्रिगर है। चूँकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए ऊर्जा लागत घटने से चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को कंट्रोल करने और महंगाई को कम करने में मदद मिलेगी। इसका सीधा फायदा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, पेंट्स और एविएशन सेक्टर को मिल सकता है। हालांकि, निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या इन गिरती कीमतों का लाभ घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचता है या नहीं।\n\n### Fed पॉलिसी और Gold का हाल\n\nUS Federal Reserve के फैसले के बाद गोल्ड और अन्य प्रीशियस मेटल्स पर बिकवाली का दबाव बढ़ा है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है, लेकिन फेड चेयर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) ने पॉलिसी मीटिंग्स को साल में 8 से घटाकर 6 करने का ऐलान किया है, जिससे भविष्य में मार्केट में वोलेटिलिटी बढ़ने की आशंका है।\n\n### डॉलर की मजबूती और रिस्क फैक्टर\n\nडॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) के 102.25 पर पहुंचने से गोल्ड की कीमतों पर दबाव पड़ा है, क्योंकि डॉलर के महंगा होने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। भारतीय बाजार के लिए, डॉलर की यह मजबूती चिंता का विषय है, क्योंकि इससे रुपया कमजोर होता है और मैन्युफैक्चरर्स के लिए आयात महंगा हो जाता है। अब बाजार की नजरें घरेलू महंगाई के आंकड़ों और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अगली मॉनेटरी पॉलिसी पर टिकी हैं।