होर्मुज पर तनाव और UAE का बाहर निकलना, OPEC+ के फैसले पर भारी
OPEC+ देशों ने जून के लिए 188,000 बैरल प्रति दिन का तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन यह कदम बाजार में सामान्य स्थिति लाने के इरादे से उठाया गया था, पर यह पूरी तरह से भू-राजनीतिक तनावों के आगे फीका पड़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टकराव और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल सप्लाई पर गहरा असर डाला है।
होर्मुज की नाकेबंदी ने रोकी सप्लाई
यह महत्वपूर्ण जलमार्ग, जो प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल या वैश्विक खपत का 20% तेल परिवहन करता है, वर्तमान में बंद है। इस नाकेबंदी के कारण सऊदी अरब, इराक, कुवैत और UAE जैसे प्रमुख उत्पादकों को मिलकर लगभग 9.1 मिलियन बैरल प्रति दिन का उत्पादन रोकना पड़ा है। ऐसे में, OPEC+ द्वारा उत्पादन बढ़ाने का कोई भी फैसला असल सप्लाई में तब्दील होने में मुश्किल आ रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में तूफानी तेजी
इस सप्लाई संकट ने कच्चे तेल की कीमतों को कई साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। Brent Crude Futures मई 2026 की शुरुआत में $108-$112 प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहे थे, जो कि संघर्ष-पूर्व के $70 के आसपास के स्तर से काफी ज्यादा है। वहीं, West Texas Intermediate (WTI) भी लगभग $101-$102 प्रति बैरल पर था।
ब्रोकरेज फर्मों का बदला अनुमान
S&P Global Ratings जैसे विश्लेषकों ने मौजूदा व्यवधानों और बढ़े भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए 2026 के लिए अपने प्राइस अनुमानों में $15 प्रति बैरल की वृद्धि की है। Goldman Sachs ने भी Q4 2026 के लिए Brent Crude का अनुमान बढ़ाकर $90 प्रति बैरल कर दिया है, जो सप्लाई संकट की ओर इशारा करता है। EIA (Energy Information Administration) भी 2026 की दूसरी तिमाही में कीमतों के $115/bbl तक पहुंचने का अनुमान लगा रहा है। इन बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने और मौद्रिक नीति पर नकारात्मक असर पड़ने की चिंताएं बढ़ गई हैं।
अमेरिकी शेल उत्पादन से सीमित राहत
ऐसे समय में जब फारस की खाड़ी से निर्यात बुरी तरह प्रभावित है, अमेरिकी शेल उत्पादन से बहुत कम राहत मिलने की उम्मीद है। 2026 में उत्पादन लगभग 13.5-13.6 मिलियन बैरल प्रति दिन पर स्थिर रहने का अनुमान है।
UAE का OPEC+ से बाहर निकलना, कार्टेल हुआ कमजोर
1 मई 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का OPEC+ से बाहर निकलना इस कार्टेल के प्रभाव और विश्वसनीयता को काफी हद तक कमजोर करता है। तीसरे सबसे बड़े उत्पादक के तौर पर UAE के जाने से OPEC की सप्लाई को मैनेज करने और कीमतों को नियंत्रित करने की क्षमता कम हो गई है, जिससे अब सऊदी अरब पर अकेले ही कीमतों को स्थिर रखने का भारी दबाव आ गया है।
बाजार का आउटलुक अनिश्चित
EIA का अनुमान है कि अगर संघर्ष अप्रैल तक समाप्त हो जाता है, तो उत्पादन धीरे-धीरे पूर्व-संघर्ष स्तरों पर लौट आएगा, जो 2026 के अंत तक संभव है। हालांकि, बाजार का तत्काल भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है। विश्लेषकों की राय बंटी हुई है; कुछ सप्लाई की कमी के कारण कीमतें ऊंची बने रहने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि अन्य लंबी अवधि की मांग के आधार पर गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं। OPEC+, जिसमें अब एक महत्वपूर्ण सदस्य कम है और जो गंभीर भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, स्थिति की निगरानी जारी रखेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के अलावा, स्वतंत्र रूप से कीमतों को प्रभावित करने की इसकी क्षमता गंभीर रूप से सीमित है। तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर रहा है।
