OPEC+ के आठ देशों वाले समूह (V8) का उत्पादन बढ़ाने का यह कदम, बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट के आगे एक मामूली कदम साबित हो सकता है। यह फैसला तेल की सप्लाई रूट्स की सुरक्षा को नजरअंदाज करता है, जो फिलहाल मार्केट को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है।
उत्पादन समायोजन: सिर्फ एक दिखावा?
OPEC+ के आठ देशों - सऊदी अरब, रूस, कुवैत, ओमान, इराक, यूएई, अल्जीरिया और कजाकिस्तान - वाले समूह (V8) ने अप्रैल महीने के लिए अपने उत्पादन कोटे में 206,000 बैरल प्रति दिन की बढ़ोतरी करने पर सहमति जताई है। यह बढ़ोतरी बाजार विश्लेषकों की 137,000 bpd की उम्मीद से ज़्यादा है। समूह ने इस फैसले के पीछे "स्थिर वैश्विक आर्थिक आउटलुक और वर्तमान मजबूत मार्केट फंडामेंटल्स" का हवाला दिया है। हालांकि, यह कारण मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता और उसके संभावित असर से बिल्कुल अलग लगता है।
हॉरमूज जलडमरूमध्य: असली मार्केट ड्राइवर
बाजार के विशेषज्ञ इस मामूली उत्पादन बढ़ोतरी की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं। मुख्य चिंता ईरान द्वारा हॉरमूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग को बाधित करने की संभावना को लेकर है। यह एक महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' है, जहां से अनुमानित 1.7 से 2 करोड़ बैरल तेल हर दिन गुजरता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी जारी की है, और इसी जलडमरूमध्य के पास एक तेल टैंकर, 'स्काइलाइट' पर हमला हुआ, जिससे सप्लाई रुकने का डर और बढ़ गया है। अगर यह जलडमरूमध्य बाधित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा करीब $72 से बढ़कर $120-$150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों के पास वैकल्पिक पाइपलाइन की कुल क्षमता केवल 30 लाख bpd के आसपास है, जो जहाजों से होने वाले पूरे ट्रैफिक को रोक दिए जाने पर पर्याप्त नहीं होगी। लॉजिस्टिक्स (Logistics) और ट्रांजिट (Transit) का जोखिम स्पष्ट रूप से मौजूदा उत्पादन लक्ष्यों से कहीं ज़्यादा है।
गैर-कार्टेल उत्पादक: अनजाने में फायदा
OPEC+ का मकसद तेल की कीमतें $70-90 प्रति बैरल के आसपास रखना है, ताकि गैर-OPEC देशों के उत्पादन में निवेश को हतोत्साहित किया जा सके। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव से प्रेरित कीमतों में अचानक बड़ा उछाल, सप्लाई में बाधाओं के कारण, अनजाने में इन्हीं प्रतिद्वंद्वी उत्पादकों को फायदा पहुंचाएगा। अमेरिका 2026 तक 1.35-1.36 करोड़ bpd के करीब उत्पादन बनाए रखने की उम्मीद है। कनाडा 2026 तक लगभग 3.5% की मामूली ग्रोथ देख रहा है, हालांकि पाइपलाइन की क्षमता एक चुनौती बनी हुई है। वहीं, ब्राजील दक्षिण अमेरिका में उत्पादन ग्रोथ का नेतृत्व करने के लिए तैयार है, जिसके 2026 तक 40-42 लाख bpd तक पहुंचने का अनुमान है। OPEC+ के बाहर से होने वाली यह अतिरिक्त सप्लाई, बढ़ी हुई कीमतों के चलते, कार्टेल की बाजार हिस्सेदारी और कीमत नियंत्रण की लंबी अवधि की रणनीति को कमजोर करती है।
रूस की क्षमता संकट: सप्लाई सुरक्षा में बाधा
इस स्थिति में एक और बड़ी समस्या रूस की है। प्रतिबंधों, पश्चिमी तकनीक की कमी और भंडारण (Storage) की गंभीर समस्याओं के कारण रूस की अतिरिक्त सप्लाई बढ़ाने की क्षमता बहुत सीमित है। विश्लेषकों का मानना है कि लॉजिस्टिक्स और भरे हुए स्टोरेज की दिक्कतों के कारण मार्च से मई के बीच रूस का तेल उत्पादन 300,000 bpd तक गिर सकता है, जिससे उसे उत्पादन कम करना पड़ेगा। रूस की यह क्षमता, संभावित सप्लाई शॉक को पूरा करने के लिए एक विश्वसनीय स्रोत नहीं है।
बड़ा रणनीतिक चूक
समुद्री सप्लाई संकट के सामने केवल 206,000 bpd की मामूली बढ़ोतरी का फैसला एक बड़ी रणनीतिक चूक है। समूह की कुल अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, जो ज़्यादातर सऊदी अरब और यूएई के पास है, करीब 25 लाख bpd मानी जाती है। यह वैश्विक सप्लाई का 3% से भी कम है और किसी भी उत्पादन वृद्धि के साथ घट जाती है। यह सीमित बफर मार्केट को बेहद नाजुक स्थिति में डालता है। इसके अलावा, 'स्वस्थ मार्केट फंडामेंटल्स' पर समूह का जोर, तेल के फिजिकल फ्लो पर तत्काल खतरे को अनदेखा करता है। समस्या मांग की नहीं, बल्कि ट्रांजिट (Transit) की सुरक्षा की है, जिसे उत्पादन वृद्धि से कोई खास समाधान नहीं मिलता।
भविष्य का नज़रिया
बाजार प्रतिभागी खाड़ी क्षेत्र (Gulf region) में होने वाली घटनाओं और हॉरमूज जलडमरूमध्य से तेल जहाजों के आवागमन की स्थिति पर करीब से नजर रखेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि कीमतें भू-राजनीतिक घटनाओं (Geopolitical Events) के प्रति बहुत संवेदनशील रहेंगी, जो OPEC+ के उत्पादन समायोजन के मामूली प्रभाव पर हावी हो सकती हैं। वर्तमान बाजार का माहौल, जिसमें उच्च भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (Risk Premium) शामिल है, कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और हॉरमूज जलडमरूमध्य में किसी भी बड़ी बाधा की स्थिति में ऊपर की ओर झुकाव का संकेत देता है।