सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए अच्छी खबर है! कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते ये कंपनियां पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर अब नुकसान नहीं झेल रही हैं। माना जा रहा है कि अगर कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो अगले 10 दिनों में ये कंपनियां ब्रेक-ईवन (न घाटा, न मुनाफा) की स्थिति में पहुंच सकती हैं। यह उस दौर के बाद आया है जब इन कंपनियों को **₹75,000 करोड़** से ज्यादा का घाटा हुआ था।
मुनाफे की ओर बढ़ते सरकारी ऑयल कंपनियां
कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल का भाव लगभग $72 प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं, भारत के लिए इंपोर्ट होने वाले कच्चे तेल (Indian Crude Oil Basket) की कीमत भी घटकर $67-68 प्रति बैरल पर आ गई है। इस गिरावट के चलते अब OMC कंपनियां पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर घाटा उठाने के बजाय मुनाफा कमाने की दहलीज पर पहुंच गई हैं। उम्मीद है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो अगले एक हफ्ते में ये कंपनियां ब्रेक-ईवन (Break-Even) की स्थिति हासिल कर लेंगी। यह उन कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत है जिन्होंने हाल ही में यानी चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ₹75,000 करोड़ से भी ज्यादा का सामूहिक घाटा झेला था।
घाटे की भरपाई पर नजर
इन कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब तक हुए भारी घाटे की भरपाई करना होगा। पेट्रोल और डीजल पर मार्जिन भले ही सुधर रहा हो, लेकिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर कंपनियों को अभी भी प्रति यूनिट करीब ₹500 का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में, अगले 6 से 12 महीनों तक निवेशकों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि क्या ये कंपनियां अपनी लागत निकाल पाती हैं और लगातार मुनाफा कमा पाती हैं। यह सब कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और भविष्य में खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।
OPEC+ का उत्पादन और सप्लाई का गणित
ग्लोबल सप्लाई की बात करें तो OPEC+ ग्रुप का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में, इस ग्रुप ने अगस्त के लिए 1,88,000 बैरल प्रति दिन उत्पादन बढ़ाने की मंजूरी दी है। यह लगातार पांचवीं बार है जब इस ग्रुप ने उत्पादन में बढ़ोतरी की है। सप्लाई बढ़ने से भारत जैसे बड़े ऑयल इंपोर्टर देशों को फायदा होता है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल विदेशों से खरीदते हैं। कम दाम पर कच्चा तेल मिलने से भारत का इंपोर्ट बिल कम होता है और स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) को भरने में भी मदद मिलती है। हालांकि, OMC की कमाई और खुदरा कीमतों पर इसका असर सरकारी नीतियों और इंटरनेशनल कमोडिटी मार्केट की चाल पर ही निर्भर करेगा। निवेशकों को आने वाली तिमाही रिपोर्ट्स पर नजर रखनी होगी, जिसमें कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन और वित्तीय स्थिरता का पता चलेगा।
