उत्तर भारत में CTC चाय की नीलामी कीमतों में जुलाई से अब तक **17%** की बड़ी गिरावट आई है। गिरते दाम और बढ़ती लागत के बीच चाय उत्पादकों के मुनाफे पर जबरदस्त दबाव बन गया है।
मुनाफे पर दोहरी मार
उत्तर भारत के चाय उद्योग के लिए मौजूदा समय काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। जुलाई के अंत से लेकर अगस्त के मध्य तक कोलकाता, गुवाहाटी और सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख नीलामी केंद्रों पर CTC चाय की औसत कीमतों में 17% की गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति चाय उत्पादकों के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रही है, क्योंकि एक तरफ सेल प्राइस घट रहा है, तो दूसरी तरफ लेबर, बिजली और फर्टिलाइजर जैसी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। चाय बागानों के फिक्स्ड खर्चे, जैसे अनिवार्य मजदूरी, कम करना लगभग नामुमकिन होता है, जिससे कर्ज में डूबी कंपनियों के लिए अपना ऑपरेशन संभालना मुश्किल हो गया है।
मौसम और प्रोडक्शन की समस्या
कीमतों के अलावा, असम और उत्तर बंगाल में खराब मौसम का सीधा असर फसल पर पड़ा है। भीषण गर्मी और उसके बाद आई बाढ़ के कारण चाय की झाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा है। जुलाई 2026 में प्रोडक्शन में अनुमानित 8% की कमी आई है। जब उत्पादन कम होता है और फिक्स्ड खर्चे स्थिर रहते हैं, तो प्रति किलो चाय की लागत बढ़ जाती है, जो कंपनियों की फाइनेंशियल हेल्थ को बिगाड़ रही है।
एक्सपोर्ट और बजट से भी निराशा
इंटरनेशनल मार्केट में भी स्थिति सामान्य नहीं है। पश्चिम एशिया (West Asia) में अस्थिरता के कारण एक्सपोर्ट की मांग में 18% की कमी देखी गई है, साथ ही फ्रेट और इंश्योरेंस के खर्चे बढ़ गए हैं। ऊपर से, 2026 के यूनियन बजट में भी चाय सेक्टर के लिए कोई विशेष राहत या सब्सिडी पैकेज न मिलने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है। अब सारा दारोमदार इस बात पर है कि आने वाले महीनों में चाय के दाम कब तक स्थिर होते हैं और कंपनियां अपने कर्ज का प्रबंधन कैसे करती हैं।
