ग्लोबल फर्म Nomura को उम्मीद है कि भारतीय स्टील कंपनियां जून तिमाही में बेहतर मुनाफे (Profit) में रहेंगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्टील की कीमतें कच्चे माल की लागत से ज्यादा बढ़ रही हैं। शेयर की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद, ब्रोकरेज का अनुमान है कि इस सेक्टर में डोमेस्टिक वॉल्यूम ग्रोथ **5-6%** सालाना रह सकती है।
कीमतों में बढ़ोतरी से मार्जिन को सहारा
Nomura की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय स्टील कंपनियों के लिए जून तिमाही (June Quarter) में मुनाफे के मार्जिन (Profit Margin) में सुधार की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण डोमेस्टिक हॉट-रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतों में आई तेजी है। पिछले तिमाही के मुकाबले HRC की कीमतें लगभग ₹4,800 प्रति टन बढ़ी हैं। यह बढ़ोतरी स्टील निर्माताओं के लिए कच्चे माल जैसे कोकिंग कोल (Coking Coal) और आयरन ओर (Iron Ore) की बढ़ती कीमतों के असर को कम करने में मदद करेगी। Nomura का अनुमान है कि इससे कंपनियों के कंसोलिडेटेड EBITDA प्रति टन में औसतन ₹1,000 का इजाफा हो सकता है।
वॉल्यूम ग्रोथ और कंपनी-विशिष्ट प्रदर्शन
कीमतों के अलावा, डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) भी सेक्टर के लिए अहम है। उम्मीद है कि इस सेक्टर में डोमेस्टिक सेल्स वॉल्यूम में 5-6% की सालाना ग्रोथ देखने को मिलेगी। इसमें Jindal Steel वॉल्यूम में 13% की वृद्धि के साथ सबसे आगे रह सकती है, जबकि JSW Steel में 6% की ग्रोथ की उम्मीद है। Tata Steel के डोमेस्टिक बिजनेस के लिए आउटलुक पॉजिटिव है, जिसके EBITDA में ₹2,000 प्रति टन का सुधार हो सकता है। हालांकि, कंपनी के यूरोप ऑपरेशन्स (European Operations) अभी भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और लॉस (Loss) में रहने की संभावना है। Nomura के अनुमान के मुताबिक, Tata Steel का कंसोलिडेटेड EBITDA जून तिमाही में ₹90 बिलियन रह सकता है, जो मार्च तिमाही के ₹98 बिलियन से थोड़ा कम है।
निवेशकों के लिए खास बातें
स्टील सेक्टर डोमेस्टिक डिमांड और इनपुट कॉस्ट (Input Cost) की अस्थिरता के बीच संतुलन बनाने के लिए काफी संवेदनशील है। हालांकि मौजूदा अनुमान बताते हैं कि भारतीय स्टील कंपनियों के पास अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने या सुधारने की अच्छी प्राइसिंग पावर (Pricing Power) है, लेकिन असल नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि HRC की मौजूदा कीमतें पूरे साल बनी रहती हैं या नहीं। निवेशक आने वाले तिमाही नतीजों पर नजर रख सकते हैं कि क्या वॉल्यूम ग्रोथ के अनुमान असल कैश फ्लो (Cash Flow) में तब्दील होते हैं और क्या यूरोपीय ऑपरेशन्स में सुधार के संकेत मिलते हैं। इस कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-Intensive) इंडस्ट्री में, खासकर अगर कच्चे माल की लागत तैयार स्टील की कीमतों से तेजी से बढ़ती है, तो कर्ज के स्तर (Debt Levels) पर नजर रखना लंबी अवधि की स्थिरता का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
