Nikhil Kamath का बड़ा बयान: 2026 में इन सेक्टर्स पर लगाएं दांव!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nikhil Kamath का बड़ा बयान: 2026 में इन सेक्टर्स पर लगाएं दांव!

Zerodha के सह-संस्थापक निखिल कामत ने 2026 के लिए एक अहम इन्वेस्टमेंट थीम की पहचान की है: ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन। उन्होंने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी संभावनाएँ बताई हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा है कि हालिया कमजोरी के बावजूद, भारतीय IT स्टॉक्स में अब वैल्यू (Value) मिल सकती है। कामत ने यह भी इशारा किया कि विदेशी निवेशक अक्सर मार्केट से गलत समय पर बाहर निकल जाते हैं, जिससे लंबी अवधि के घरेलू निवेशकों के लिए मौके बन सकते हैं।

क्या है मामला?

Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामत ने ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन को लंबी अवधि के लिए एक बड़ा इन्वेस्टमेंट थीम बताया है। उन्होंने एनर्जी सिक्योरिटी के लिए महत्वपूर्ण सेक्टर्स, खास तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करने की बात कही है। इसके साथ ही, कामत ने भारतीय इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर पर एक विपरीत (Contrarian) राय रखी है। भले ही इस सेक्टर ने 2026 में ब्रॉडर मार्केट के मुकाबले खराब प्रदर्शन किया हो, लेकिन उनका मानना ​​है कि कई अच्छी तरह से प्रबंधित IT कंपनियां अब ऐसी वैल्यूएशन (Valuation) पर ट्रेड कर रही हैं जो उन्हें लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती हैं।

एनर्जी ट्रांजिशन पर दांव

कामथ की एनर्जी में दिलचस्पी बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) के कारण है, जिसने एनर्जी सिक्योरिटी की जरूरत को सामने लाया है। एनर्जी ट्रांजिशन वैल्यू चेन (Value Chain) में निवेश करके, उनका सुझाव है कि निवेशक क्लीनर, अधिक रेसिलिएंट पावर सिस्टम्स की ओर स्ट्रक्चरल शिफ्ट (Structural Shift) में भाग ले सकते हैं। इसमें EV बैटरी के प्रोडक्शन, पावर ट्रांसमिशन का प्रबंधन करने वाली कंपनियों और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने वाली संस्थाएं शामिल हैं। इस सेक्टर को पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से दूर जाने वाले ग्लोबल पिवट (Global Pivot) का लाभ उठाने का एक तरीका देखा जा रहा है।

IT पर विपरीत राय क्यों?

2026 में भारतीय IT सेक्टर को काफी दबाव का सामना करना पड़ा है, Nifty IT इंडेक्स अपने चरम से काफी नीचे गिर गया है। इस प्रदर्शन के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल्स को बाधित करने, ग्लोबल क्लाइंट्स द्वारा कमजोर डिस्क्रिशनेरी स्पेंडिंग (Discretionary Spending) और वैल्यूएशन रीसेट (Valuation Reset) जैसी चिंताओं का हाथ रहा है। कामत का नजरिया बताता है कि मार्केट ने इन शॉर्ट-टर्म हेडविंड्स (Headwinds) पर शायद ज्यादा प्रतिक्रिया दी है। सेक्टर को अंडरवैल्यूड (Undervalued) मानकर, वह इशारा कर रहे हैं कि मौजूदा शेयर की कीमतें स्थापित IT सर्विसेज फर्मों की लॉन्ग-टर्म अर्निंग पोटेंशियल (Earnings Potential) को पूरी तरह से नहीं दर्शा सकती हैं, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से मजबूत कैश फ्लो (Cash Flows) और ऑपरेशनल स्टेबिलिटी (Operational Stability) बनाए रखी है।

FIIs की बिकवाली और मार्केट का संदर्भ

कामत ने फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) के व्यवहार पर भी टिप्पणी की, जो 2026 के दौरान भारतीय बाजार में नेट सेलर्स (Net Sellers) रहे हैं। इस साल के आंकड़े दिखाते हैं कि फॉरेन आउटफ्लो (Foreign Outflows) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो अक्सर ग्लोबल रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट (Risk-off Sentiment) और अन्य बाजारों या एसेट क्लासेस (Asset Classes) को प्राथमिकता देने के कारण होता है। कामत ने एक ऐतिहासिक पैटर्न देखा है जहां विदेशी फंड भारतीय बाजारों से तब बाहर निकलते हैं जब वैल्यूएशन कम होती है और तब लौटते हैं जब कीमतें पहले से ही महंगी हो चुकी होती हैं। यह चक्र अक्सर अस्थायी अस्थिरता (Volatility) पैदा करता है, लेकिन लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले घरेलू निवेशकों के लिए क्वालिटी एसेट्स (Quality Assets) जमा करने का मौका भी देता है।

निवेशक आगे क्या देखें?

निवेशक आगे कई फैक्टर्स पर नजर रख सकते हैं। एनर्जी सेक्टर में, सरकारी नीतियों, EV और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए सब्सिडी अपडेट्स और ग्रिड आधुनिकीकरण की गति पर नजर रखना आवश्यक होगा। IT सेक्टर के लिए, मुख्य मॉनिटर करने वाली चीजें क्लाइंट्स का स्पेंडिंग पर कमेंट्री, AI को अपनाने का प्रॉफिट मार्जिन्स (Profit Margins) पर वास्तविक वित्तीय प्रभाव और आगामी तिमाही नतीजों में दिया जाने वाला गाइडेंस (Guidance) होगा। हालांकि कामत का नजरिया संभावित वैल्यू को उजागर करता है, अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि ये कंपनियां बदलते ग्लोबल टेक रिक्वायरमेंट्स (Tech Requirements) के अनुसार अपने बिजनेस मॉडल्स को कितना अनुकूलित कर पाती हैं और क्या अपेक्षित डिमांड रिकवरी (Demand Recovery) साकार होती है।

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