Nifty 50 का बड़ा कमाल: 24,000 के पार, तेल की कीमतों में गिरावट और शांति की उम्मीदें बनीं वजह

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Nifty 50 का बड़ा कमाल: 24,000 के पार, तेल की कीमतों में गिरावट और शांति की उम्मीदें बनीं वजह
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार में सोमवार को शानदार तेज़ी देखने को मिली, जहाँ Nifty 50 इंडेक्स ने **24,000** का आंकड़ा पार कर लिया। इस उछाल की मुख्य वजहें अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की उम्मीदों के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट रहीं। बैंकिंग शेयरों में विशेष रूप से ज़बरदस्त खरीदारी हुई।

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शांति की उम्मीदों से बाज़ार में रौनक

सोमवार को निवेशकों का सेंटीमेंट (Sentiment) काफी बेहतर दिखा, जिसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की संभावना थी। ऐसी खबरें आईं कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक समझौता लगभग पूरा हो चुका है। इसके तुरंत बाद एनर्जी मार्केट (Energy Market) में प्रीमियम कम हो गया। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फ्यूचर्स 5% से ज़्यादा गिरकर $100 प्रति बैरल से नीचे आ गए। यह भारत जैसी तेल आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत की बात है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने तक नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी, इसलिए थोड़ी सावधानी बरतना ज़रूरी है।

बैंकिंग शेयरों ने भरी उड़ान

सोमवार की तेज़ी में फाइनेंशियल स्टॉक्स (Financial Stocks) सबसे आगे रहे। बैंक निफ्टी (Bank Nifty) 2% से ज़्यादा चढ़कर 55,000 के पार निकल गया। HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank जैसे बड़े प्राइवेट बैंकों में संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की तरफ से लगातार खरीदारी देखने को मिली। यह रुझान ब्याज दरों में स्थिरता के प्रति आशावाद दिखाता है, क्योंकि तेल की कम कीमतों से महंगाई को काबू किया जा सकता है। इससे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को मौद्रिक नीति (Monetary Policy) में ढील देने का मौका मिल सकता है।

बाज़ार की कमज़ोरियां और जोखिम

भले ही इंडेक्स 24,000 के स्तर पर पहुंच गया हो, लेकिन टेक्निकल इंडिकेटर्स (Technical Indicators) बताते हैं कि यह तेज़ी अभी मुश्किलों का सामना कर सकती है। बियरिश गैप ज़ोन्स (Bearish Gap Zones) और 52-दिन की एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (Exponential Moving Average) से इसे रेजिस्टेंस (Resistance) मिल रहा है। व्यापक बाज़ार अभी भी 2026 में हुई भारी गिरावट से उबर रहा है, खासकर IT और कंज्यूमर सेक्टर में। मुख्य इंडेक्स और कई अलग-अलग शेयरों के बीच का अंतर, जिनमें से कुछ इस साल 20% से ज़्यादा गिरे हैं, बाज़ार की संकीर्ण चौड़ाई (Narrow Market Breadth) को दर्शाता है। ऐसे में, अगर शांति सौदा विफल होता है या उसमें देरी होती है, तो निफ्टी में और ज़्यादा उतार-चढ़ाव का खतरा बना रहेगा।

F&O एक्सपायरी से पहले की रणनीति

अब ट्रेडर्स (Traders) का ध्यान 26 मई को होने वाली मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी (Derivatives Expiry) पर है। विश्लेषकों का मानना है कि 23,800–23,900 का रेंज, जो पहले एक मजबूत रेजिस्टेंस था, को सपोर्ट (Support) बनाए रखना होगा ताकि 24,500 की ओर और बढ़त देखी जा सके। अमेरिकी बाज़ार मेमोरियल डे की वजह से बंद रहेंगे, ऐसे में बाज़ार में कंसॉलिडेशन (Consolidation) देखने को मिल सकता है। निवेशक मध्य पूर्व की बातचीत से निराशा के जोखिम के मुकाबले बाज़ार के ट्रेंड में बदलाव की संभावनाओं का आकलन करेंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.