आज भारतीय शेयर बाज़ारों में अच्छी शुरुआत होने की उम्मीद है, गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) के हरे निशान में कारोबार करने के संकेत मिल रहे हैं। पिछले तीन दिनों से लगातार गिर रहे कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है।
क्या हुआ आज?
घरेलू शेयर बाज़ारों में आज तेजी की उम्मीद है। पिछले कारोबारी सत्र में दिखी रिकवरी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में उछाल देखने को मिल सकता है। गिफ्ट निफ्टी, जो निफ्टी 50 का प्रदर्शन ट्रैक करता है, 24,181.50 के करीब कारोबार कर रहा है। यह संकेत देता है कि आज भारतीय शेयर बाज़ार हरे निशान में खुल सकते हैं। बुधवार को निफ्टी 50 0.59% और BSE सेंसेक्स 0.58% की बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे दो दिनों की गिरावट का सिलसिला टूटा था। निफ्टी 50 ने 24,005.85 पर क्लोजिंग दी थी, वहीं सेंसेक्स 76,922.64 पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल में नरमी का फायदा
कमोडिटी बाज़ारों में कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। सितंबर डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत $71 प्रति बैरल के करीब है, जो लगातार तीसरे दिन की गिरावट को दर्शाता है। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $68 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
इस गिरावट की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की आपूर्ति में सुधार की खबरें और अमेरिका व ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति के संकेत हैं। दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक भारत के लिए, ऊर्जा की कम कीमतें एक बड़ा सकारात्मक पहलू हैं। तेल की कीमतों में स्थिरता से देश का आयात बिल कम हो सकता है, महंगाई का दबाव कम हो सकता है और चालू खाता घाटा (current account balance) सुधर सकता है। इसके अलावा, कम इनपुट लागत अक्सर पेंट निर्माताओं, टायर कंपनियों और एविएशन फर्मों जैसे विभिन्न क्षेत्रों के मुनाफे (profit margins) को सहारा देती है, जबकि तेल विपणन कंपनियों (oil marketing companies) को भी राहत मिलती है।
ग्लोबल टेक बिकवाली vs भारतीय बाज़ार की मजबूती
जहां घरेलू बाज़ार में सेंटीमेंट सकारात्मक है, वहीं वैश्विक बाज़ार दबाव झेल रहे हैं। एशियाई सूचकांकों (Asian indices) में भारी गिरावट आई है, दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 6.67% और जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 2.23% लुढ़क गया। यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों (technology shares) की बिकवाली के कारण है, जिसका असर वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा है।
इसके बावजूद, भारतीय बाज़ारों ने हाल के दिनों में मजबूती दिखाई है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यह भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों की संरचना (structure) के कारण है, जिनमें वित्तीय सेवाओं (financial services) और घरेलू मांग-संचालित व्यवसायों (domestic-demand-driven businesses) का भारी वेटेज है। कोरिया या ताइवान जैसे सूचकांकों के विपरीत, जिनमें सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हार्डवेयर कंपनियों की भारी एकाग्रता है, भारत के निफ्टी और सेंसेक्स वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों की अस्थिरता (volatility) से सीधे तौर पर कम प्रभावित होते हैं।
निवेशक इसे कैसे देखें?
निवेशक अक्सर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए तेल की कीमतों के संबंध को एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक के रूप में देखते हैं। जहां कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत की मैक्रो स्थिरता (macro stability) के लिए अनुकूल है, वहीं वैश्विक टेक-सेक्टर में आई बिकवाली पर नजर रखना भी जरूरी है। बाज़ार सहभागियों द्वारा यह देखा जाएगा कि क्या घरेलू मजबूती वैश्विक टेक अस्थिरता से अलग रह पाती है। जब वैश्विक सेंटीमेंट कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशक कभी-कभी उभरते बाज़ारों (emerging markets) से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं, जिससे घरेलू फंडामेंटल्स की परवाह किए बिना स्थानीय शेयर की कीमतों में अस्थायी उतार-चढ़ाव आ सकता है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों के लिए आज की मुख्य बात यह होगी कि बाज़ार कितनी मजबूती से खुलता है और क्या निफ्टी 50 24,000 के स्तर को बनाए रख पाता है। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति प्रवाह (supply flows) पर किसी भी नई टिप्पणी पर भी नज़र रखी जाएगी। हालांकि कम तेल की कीमतें भारत के लिए एक सकारात्मक संरचनात्मक कारक हैं, लेकिन निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि वैश्विक टेक्नोलॉजी बिकवाली का घरेलू आईटी सेक्टर पर क्या असर पड़ता है।
