इंडोनेशिया अपने 2026 माइनिंग कोटा को बढ़ाकर **360 मिलियन टन** कर सकता है, जिससे निकेल की कीमतों पर दबाव आने की आशंका है। इस कदम से सप्लाई में ढील मिलने और स्टेनलेस स्टील व EV बैटरी निर्माताओं के लिए लागत कम होने की उम्मीद है।
Detailed Coverage
इंडोनेशिया के फैसले से निकेल मार्केट में हलचल
दुनिया के सबसे बड़े निकेल सप्लायर में से एक, इंडोनेशिया, अपने माइनिंग वर्क प्लान और कोटा (RKAB) को 2026 के लिए बढ़ाकर 360 मिलियन टन करने पर विचार कर रहा है। यह वर्तमान 250 से 260 मिलियन टन के कोटे से एक बड़ी बढ़ोतरी होगी।
सप्लाई और कीमतों पर असर
अगर यह कोटा बढ़ाया जाता है, तो इससे निकेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। निकेल, स्टेनलेस स्टील और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी बनाने के लिए एक जरूरी कच्चा माल है। सप्लाई में ढील मिलने से इस साल की शुरुआत में कीमतों में आई अस्थिरता कम हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया के चीफ इकोनॉमिस्ट ऑफिस के विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में निकेल की कीमतें औसतन $17,500 प्रति टन के आसपास रह सकती हैं। यदि निकेल अयस्क की सप्लाई बढ़ती है, तो साल की दूसरी छमाही में कीमतों में नरमी की उम्मीद है।
विश्लेषकों के मिले-जुले अनुमान
BMI (Fitch Solutions) ने अपने 2026 के प्राइस अनुमान को $16,600 प्रति टन से बढ़ाकर $17,000 प्रति टन कर दिया है। इसके बावजूद, एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में सरप्लस बना रह सकता है, जो कीमतों में बड़ी तेजी को सीमित कर सकता है। फिलहाल निकेल की कीमतें लगभग $16,950 प्रति टन के आसपास हैं।
निवेशकों के लिए खास बातें
इंडोनेशिया के कोटा फैसले के अलावा, सल्फ्यूरिक एसिड जैसे कच्चे माल की कमी से हाई-प्रेशर एसिड लीच (HPAL) आउटपुट के उत्पादन में रुकावटें भी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। निवेशकों को इंडोनेशिया के माइनिंग परमिट के फैसले पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि 360 मिलियन टन का फाइनल कोटा मार्केट की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही, स्टेनलेस स्टील सेक्टर की मांग और EV को अपनाने की रफ्तार भी 2026 के बाकी समय में मार्केट सरप्लस को निर्धारित करेगी।
