भारत के जेम्स और ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स के लिए एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत **10%** का नया टैरिफ लगाया है, जिससे कुल इम्पोर्ट ड्यूटी लगभग **16%** तक पहुँच गई है। इस फैसले का असर नेचुरल डायमंड, लैब-ग्रोन स्टोन और तैयार ज्वेलरी पर पड़ेगा।
Detailed Coverage
अमेरिका का बड़ा फैसला: इम्पोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी
भारतीय जेम्स और ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स को अब अमेरिका में अपने प्रोडक्ट्स भेजने के लिए बड़ा शुल्क चुकाना होगा। अमेरिका ने 24 जुलाई, 2026 से सेक्शन 301 पॉलिसी के तहत भारतीय सामानों पर 10% का नया टैरिफ लागू कर दिया है। यह फैसला फोर्सड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुडी कंप्लायंस को लेकर लिया गया है। पहले से लगे लगभग 5.5% से 6% MFN (मोस्ट फेवर्ड नेशन) ड्यूटी को मिलाकर, अब भारतीय ज्वेलरी पर अमेरिका में कुल इम्पोर्ट ड्यूटी 16% के करीब पहुँच गई है।
कॉम्पिटिशन में भारत को बड़ा नुकसान
हालांकि, अमेरिका का यह 10% टैरिफ चीन, हांगकांग और UAE जैसे देशों पर लगे 12.5% टैरिफ से कम है, लेकिन यह भारत को उन देशों के मुकाबले बड़े नुकसान में डालता है जहाँ से अमेरिका जीरो-ड्यूटी पर इम्पोर्ट करता है। नेचुरल डायमंड के बड़े एक्सपोर्टर्स, जैसे अफ्रीका के बोत्सवाना, नामीबिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के साथ-साथ बेल्जियम जैसे ट्रेडिंग हब, अमेरिका के बाजार में बिना किसी ड्यूटी के पहुंच बनाए हुए हैं।
प्रोडक्ट कैटेगरी पर असर
इस नए ड्यूटी स्ट्रक्चर का असर सिर्फ तैयार गोल्ड और डायमंड ज्वेलरी पर ही नहीं, बल्कि रॉ और पॉलिशड नेचुरल डायमंड, कलर्ड जेमस्टोन्स और तेजी से बढ़ते हुए लैब-ग्रोन डायमंड सेगमेंट पर भी पड़ेगा। बिजनेस के लिए, लागत में अचानक यह बढ़ोतरी मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। अगर एक्सपोर्टर्स कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए इस टैरिफ का बोझ खुद उठाते हैं, तो उनकी प्रॉफिटेबिलिटी कम हो सकती है। वहीं, अगर वे यह लागत अमेरिकी रिटेलर्स और ग्राहकों पर डालते हैं, तो कम ड्यूटी वाले देशों के प्रोड्यूसर्स से कॉम्पिटिशन में मार्केट शेयर खोने का खतरा है।
इंडस्ट्री की चिंता और समाधान की तलाश
जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने भारतीय एक्सपोर्ट्स को फोर्सड लेबर के साथ जोड़ने पर गहरी चिंता जताई है और कहा है कि यह वर्गीकरण गलत है। काउंसिल ने भारत की फॉरेन ट्रेड पॉलिसी का समर्थन किया है, जो फोर्सड लेबर से जुड़े सामानों के इम्पोर्ट पर रोक लगाती है। GJEPC के चेयरमैन, किरिट भंसाली, ने बताया है कि इंडस्ट्री कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग कर रही है और उम्मीद है कि भारत-अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (bilateral trade agreement) भविष्य में इन शुल्कों से राहत दे सकता है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर के निवेशकों को उन कंपनियों के बारे में स्पेसिफिक अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए जिनका अमेरिका के बाजार में एक्सपोजर है, क्योंकि यह भारतीय तैयार ज्वेलरी के लिए एक प्रमुख डेस्टिनेशन बना हुआ है। आने वाली तिमाही रिपोर्ट्स में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनियाँ अपने एक्सपोर्ट वॉल्यूम को बनाए रख पाती हैं। इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच किसी भी औपचारिक व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति भविष्य में एक बड़ा ट्रिगर साबित हो सकती है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स प्राइसिंग स्ट्रैटेजी में संभावित बदलावों पर भी नजर रखेंगे और यह देखेंगे कि यह सेक्टर इस उच्च ड्यूटी स्ट्रक्चर के असर को कम करने के लिए अपनी सप्लाई चेन या प्रोडक्ट मिक्स को कैसे एडजस्ट करता है।
