पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के चलते Nayara Energy ने यह अहम कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल $119 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिसके चलते नयरा एनर्जी जैसी प्राइवेट रिटेलर्स को अपनी बढ़ती इंपोर्ट कॉस्ट का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमतों में ₹5.30 प्रति लीटर तक और डीज़ल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है, हालांकि यह बढ़ोतरी स्थानीय टैक्स के अनुसार राज्यों में अलग-अलग है।
यह फैसला सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Ltd (BPCL), और Hindustan Petroleum Corporation Ltd (HPCL) के ठीक विपरीत है। ये कंपनियां, जो देश के 90% से अधिक फ्यूल रिटेल बाजार पर हावी हैं, अप्रैल 2022 से ही आम पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें स्थिर रखे हुए हैं। वे इन बढ़ती लागतों का घाटा खुद झेल रही हैं। ICICI Securities के अनुमान के अनुसार, OMCs को डीज़ल पर लगभग ₹13.5 प्रति लीटर और पेट्रोल पर ₹1 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। वे पिछले समय में कम तेल कीमतों से कमाए गए मुनाफे का उपयोग करके उपभोक्ताओं को तत्काल मूल्य वृद्धि से बचा रही हैं।
Nayara Energy देश की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर है, जिसके 6,600 से अधिक आउटलेट हैं। वहीं, Reliance Industries और BP के ज्वाइंट वेंचर Jio-bp के 2,000 से अधिक आउटलेट हैं। Jio-bp ने भी कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन वह एडिटिव्स वाले पेट्रोल को सामान्य कीमत पर बेचकर बाजार हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।
Nayara Energy का यह कदम भारत के प्राइस-सेंसिटिव फ्यूल बाजार में प्राइवेट कंपनियों की कमजोरी को दर्शाता है। सरकारी समर्थन या मुआवजे के बिना, ये कंपनियां वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और मुद्रा उतार-चढ़ाव की अस्थिरता का सामना करती हैं। सरकारी कंपनियों द्वारा लगातार मूल्य वृद्धि को रोकना उपभोक्ताओं के लिए तो फायदेमंद है, लेकिन यह प्राइवेट कंपनियों के मुनाफे को नुकसान पहुंचा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि सरकार द्वारा महंगाई को नियंत्रित करने के निर्देशानुसार, सरकारी कंपनियां आगे भी कीमतों में होने वाले बदलावों को झेलती रहेंगी। इससे सरकारी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा और Nayara जैसी प्राइवेट कंपनियों पर भी। यह बाजार दो हिस्सों में बंटा रहेगा: एक उपभोक्ता-सुरक्षित हिस्सा जो सरकारी नीति द्वारा प्रबंधित होता है, और दूसरा बाजार की अर्थव्यवस्था द्वारा संचालित।