Natural Rubber Price: रबर की कीमतों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, ₹290 के पार; टायर कंपनियों के लिए खतरे की घंटी?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Natural Rubber Price: रबर की कीमतों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, ₹290 के पार; टायर कंपनियों के लिए खतरे की घंटी?

भारत में नेचुरल रबर (RSS-IV grade) की कीमतें रिकॉर्ड **₹290 प्रति किलो** पर पहुंच गई हैं। सप्लाई में भारी कमी के चलते टायर बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ गई है, जिससे आने वाली तिमाहियों में उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत में नेचुरल रबर की कीमतें पहली बार ₹290 प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई हैं। यह तेजी घरेलू बाजार में सप्लाई की किल्लत और ऑटो सेक्टर की तरफ से बनी मजबूत डिमांड की वजह से है। हैरानी की बात यह है कि भारतीय बाजार बैंकॉक के इंटरनेशनल बेंचमार्क के मुकाबले ₹20 प्रति किलो के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है, जो सप्लाई और डिमांड के बीच बड़े असंतुलन को दिखाता है।

क्यों कम हो रही है सप्लाई?

रबर किसानों ने अब पारंपरिक शीट रबर के बजाय लेटेक्स और कप लंप प्रोडक्ट्स पर ध्यान देना शुरू कर दिया है, क्योंकि उनमें प्रॉफिट मार्जिन बेहतर है। इसके अलावा, दक्षिण भारत में भीषण गर्मी के कारण रबर का उत्पादन प्रभावित हुआ है। हर महीने औसतन 75,000 टन आयात के बावजूद टायर कंपनियों की भारी मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

टायर कंपनियों पर क्या होगा असर?

टायर बनाने में रबर एक कच्चा माल है। इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के EBITDA मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है। चुनौती यह है कि अगर कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी नहीं कर पाईं, तो मुनाफा घट जाएगा। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने सिंथेटिक रबर को भी महंगा कर दिया है, जिससे कंपनियों के पास लागत घटाने का विकल्प कम हो गया है।

अब आगे क्या?

बाजार की नजर अब मानसून के दौरान पैदावार पर टिकी है। एनालिस्ट्स ₹300 प्रति किलो के मनोवैज्ञानिक स्तर को अहम मान रहे हैं। निवेशकों को अब टायर कंपनियों के अगले तिमाही नतीजों का इंतजार करना चाहिए। यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल पाती हैं या उनके मार्जिन में गिरावट देखने को मिलती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.