देश के कमोडिटी मार्केट में Natural Rubber के दाम रिकॉर्ड **₹300** प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। सप्लाई में **5 लाख टन** से ज्यादा की कमी और खराब मौसम के चलते यह उछाल आया है, जिससे टायर और रबर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है।
घरेलू बाजार में Natural Rubber की कीमतें एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई हैं, जो पहले कभी नहीं देखी गईं। नवंबर 2026 की शुरुआत में ही RSS-4 ग्रेड की रबर ₹300 प्रति किलो के स्तर को छू गई है। यह तेजी कमोडिटी जगत में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है, जिसके पीछे सप्लाई की तंगी और वैश्विक कारण मुख्य हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
बाजार में इस समय मांग और सप्लाई का भारी अंतर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 5.22 लाख टन रबर की कमी है। केरल जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भारी मानसून और अल-नीनो के असर ने रबर की टैपिंग प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे मार्केट में सप्लाई कम हो गई है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण Synthetic Rubber भी महंगी हो गई है, जिससे लोग अब Natural Rubber की तरफ रुख कर रहे हैं, जो इसके दामों को और ऊपर खींच रहा है।
टायर और रबर इंडस्ट्री पर असर
Apollo Tyres और Balkrishna Industries जैसी कंपनियों के लिए यह रॉ-मटेरियल की महंगाई एक बड़ी चुनौती है। रबर टायर बनाने का सबसे मुख्य हिस्सा है, इसलिए जब दाम इस तरह तेजी से बढ़ते हैं, तो कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है। कंपनियां अक्सर लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव तय है। निवेशक अब इन कंपनियों की आगामी तिमाही नतीजों में मार्जिन की स्थिति पर बारीक नजर रख रहे हैं।
सरकार की भूमिका और जोखिम
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अंतर के चलते अब आयात (Import) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अगर घरेलू कीमतें वैश्विक दरों से बहुत ज्यादा ऊपर बनी रहीं, तो सरकार ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दे सकती है। निवेशकों के लिए Rubber Board की अगली टिप्पणियां और सरकारी ट्रेड पॉलिसी में बदलाव पर नजर रखना बहुत जरूरी होगा।
