अंतरराष्ट्रीय बाजार में नेचुरल डायमंड्स की चमक फीकी पड़ गई है। पिछले चार सालों में पॉलिश किए हुए डायमंड्स की कीमतों में 46% की भारी गिरावट देखी गई है। इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण हैं। विकसित देशों के प्रमुख बाजारों में कंज्यूमर डिमांड कमजोर पड़ी है, वहीं लैब-ग्रेउन डायमंड्स (LGDs) की बढ़ती लोकप्रियता और उनकी सुलभता ने नेचुरल डायमंड्स के मार्केट शेयर को घटाया है। इसके अलावा, चीन का बाजार, जो डायमंड की खपत का एक पारंपरिक गढ़ रहा है, वह भी आर्थिक मंदी की मार झेल रहा है।
माइनिंग दिग्गजों पर गिरी गाज
इस दबाव का असर बड़े डायमंड माइनिंग कंपनियों पर साफ दिख रहा है। रूस की दिग्गज डायमंड माइनिंग कंपनी Alrosa के स्टॉक की कीमतों में 77% की भारी गिरावट आई है। वहीं, प्रतिष्ठित De Beers ब्रांड की पैरेंट कंपनी Anglo American ने हाल ही में $2.3 बिलियन का एक बड़ा impairment charge (संपत्ति का मूल्यांकन घटाना) घोषित किया है। ये आंकड़े नेचुरल डायमंड सेक्टर पर पड़ रहे गंभीर दबाव को दर्शाते हैं।
भारत का अनूठा मार्केट रेजिस्टेंस
इस ग्लोबल डाउनटर्न के बीच, भारत एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है। देश के डोमेस्टिक डायमंड मार्केट में लगातार मजबूत मांग बनी हुई है। इस मजबूती का श्रेय काफी हद तक भारतीय शादियों और खास मौकों पर डायमंड्स के गहरे सांस्कृतिक महत्व को जाता है। इसके अलावा, भारत में सोने की लगातार ऊंची कीमतें अक्सर कंज्यूमर खर्च को डायमंड्स जैसी अन्य कीमती संपत्तियों की ओर मोड़ देती हैं, जिससे एक खास सुरक्षा कवच बनता है जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट से बचाता है।