Electronic Gold Receipts (EGR) में निवेशकों की कम दिलचस्पी को देखते हुए National Stock Exchange (NSE) ने बड़ा कदम उठाया है। 15 अक्टूबर 2026 को नया मोबाइल ऐप लॉन्च होगा, साथ ही 1,000 नए कलेक्शन सेंटर्स और 10mg की छोटी लॉट साइज की सुविधा शुरू की जाएगी।
तेजी के लिए नया ब्लूप्रिंट
लंबे समय से EGR सेगमेंट में सुस्त कारोबार देखा जा रहा है, जहां डेली वॉल्यूम अक्सर ₹2 करोड़ के आंकड़े को भी पार नहीं कर पा रहा है। इसी सुस्ती को खत्म करने के लिए NSE अब फिजिकल गोल्ड से डिजिटल ट्रेडिंग तक के सफर को बेहद आसान बनाने जा रहा है।
छोटे निवेशकों को मिलेगी राहत
अब तक फिजिकल गोल्ड को EGR में बदलने की प्रक्रिया काफी मुश्किल और खर्चीली थी, जिससे छोटे निवेशक दूर रहते थे। इसे सरल बनाने के लिए एक्सचेंज ने निम्नलिखित बदलाव किए हैं:
- 1,000 कलेक्शन सेंटर्स: एक्सचेंज देश भर में ऑथराइज्ड सेंटर बढ़ा रहा है।
- छोटी लॉट साइज: अब आप 10mg की छोटी मात्रा में भी ट्रेड कर पाएंगे, जिससे निवेश की बाधाएं कम होंगी।
- फास्ट सर्विस: एक्सचेंज ने गोल्ड डीमैटरियलाइजेशन की प्रक्रिया को महज 2 घंटे में पूरा करने का दावा किया है।
अभी भी हैं चुनौतियां
इन सुधारों के बावजूद मार्केट एक्सपर्ट्स कुछ बुनियादी समस्याओं की ओर इशारा कर रहे हैं। सबसे बड़ी रुकावट 3% GST है, जो फिजिकल गोल्ड कन्वर्जन के दौरान निवेशकों पर बोझ डालती है। इसकी वजह से EGR फिलहाल Gold ETFs या Sovereign Gold Bonds के मुकाबले कम आकर्षक नजर आते हैं। इसके अलावा, ब्रोकरेज फर्मों के साथ सिस्टम इंटीग्रेशन का काम अभी भी जारी है, जो शुरुआती दौर में अडॉप्शन की गति को धीमा कर सकता है।
अब देखना यह है कि क्या ये बुनियादी ढांचे में बदलाव टैक्स और अन्य ऑपरेशनल लागतों पर भारी पड़ पाएंगे। भविष्य में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या एक्सचेंज इसमें SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) जैसी सुविधाएं भी लाता है, जिससे इस सेगमेंट में लगातार पैसा आता रहे।
