NSE का बड़ा कदम: 27 जुलाई को लॉन्च होंगे भारत के पहले डोमेस्टिक नेचुरल गैस फ्यूचर्स

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NSE का बड़ा कदम: 27 जुलाई को लॉन्च होंगे भारत के पहले डोमेस्टिक नेचुरल गैस फ्यूचर्स

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 27 जुलाई को भारतीय नेचुरल गैस फ्यूचर्स लॉन्च करने जा रहा है। यह देश का पहला ऐसा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट होगा जो डोमेस्टिक प्राइस बेंचमार्क से जुड़ा होगा। यह कैश-सेटलमेंट वाला इंस्ट्रूमेंट है, जिससे पार्टिसिपेंट्स इंडियन गैस एक्सचेंज (IGX) के गुजरात हब को रेफरेंस मानकर गैस मार्केट में होने वाले प्राइस फ्लक्चुएशन से बच सकेंगे।

Detailed Coverage

डोमेस्टिक प्राइसेस से जुड़ाव

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से मंजूरी मिलने के बाद, ये फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स NATGASIND टिकर सिंबल के तहत ट्रेड होंगे। पहले के एनर्जी डेरिवेटिव्स के विपरीत, जो अक्सर ग्लोबल बेंचमार्क पर आधारित होते थे, यह कॉन्ट्रैक्ट खास तौर पर इंडियन गैस एक्सचेंज (IGX) के गुजरात के दहेज हब में नेचुरल गैस की कीमत से जुड़ा है। डोमेस्टिक रेफरेंस पॉइंट का इस्तेमाल करके, एक्सचेंज का लक्ष्य भारतीय बाजार में मांग और आपूर्ति की स्थितियों को और सटीक रूप से दर्शाना है। कॉन्ट्रैक्ट्स को इंडियन रुपी प्रति mmBtu में कोट किया जाएगा, जिसमें ट्रांसपोर्टेशन और टैक्स जैसे खास खर्चे शामिल नहीं होंगे।

इन्वेस्टर्स के लिए सेटलमेंट कैसे काम करेगा?

ये फ्यूचर्स कैश-सेटल होने वाले हैं, जिसका मतलब है कि ट्रेडर्स को नेचुरल गैस की फिजिकल डिलीवरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी। इसके बजाय, फाइनल सेटलमेंट प्राइस कॉन्ट्रैक्ट पीरियड के दौरान IGX हब में डिलीवर की गई गैस की मंथली वेटेड एवरेज प्राइस पर आधारित होगा। कुछ कैटेगरी, जैसे सरकारी-निर्धारित सीलिंग प्राइस पर ट्रेड की गई गैस या लॉन्ग-ड्यूरेशन कॉन्ट्रैक्ट्स को कैलकुलेशन से बाहर रखा गया है, ताकि बेंचमार्क मार्केट-ड्रिवन रेट्स को दर्शाए। NSE Clearing सभी ट्रांजैक्शन्स की निगरानी करेगा, जिसमें स्टैंडर्ड रिस्क मैनेजमेंट प्रैक्टिस जैसे डेली मार्क-टू-मार्केट सेटलमेंट्स और अचानक प्राइस फ्लक्चुएशन से बचाने के लिए इनिशियल मार्जिन्स का कलेक्शन शामिल होगा।

मार्केट पर असर और मॉनिटरिंग

एनर्जी सेक्टर के पार्टिसिपेंट्स, जिनमें इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स और गैस मार्केटर्स शामिल हैं, के लिए यह एक नया टूल है जो एनर्जी कॉस्ट के उतार-चढ़ाव के जोखिम को मैनेज करने में मदद करेगा। वर्तमान में, भारत का नेचुरल गैस मार्केट बढ़ रहा है, क्योंकि सरकार देश के कुल एनर्जी मिक्स में गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस नए फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितना वॉल्यूम आकर्षित करता है और इसका फ्यूचर्स प्राइस बिजनेसेज द्वारा फेस किए जाने वाले असल कॉस्ट को कितना बारीकी से दर्शाता है। इन्वेस्टर्स और मार्केट एनालिस्ट आने वाले महीनों में ट्रेडिंग वॉल्यूम और स्पॉट प्राइस के साथ इसके स्प्रेड को ट्रैक करेंगे ताकि प्राइस स्टेबिलिटी प्रदान करने में इस नए बेंचमार्क की प्रभावशीलता का अंदाजा लगाया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.