NSE के Electronic Gold Receipts (EGR) सेगमेंट ने धनतेरस 2026 पर इतिहास रचते हुए **1.8 लाख** यूनिट्स की ट्रेडिंग दर्ज की है, जिसका कुल वॉल्यूम **₹26.46 करोड़** रहा।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अब भारतीय परिवारों को फिजिकल गोल्ड रखने के बजाय डिजिटल विकल्प की ओर मोड़ने के लिए जोर-शोर से काम कर रहा है। 6 नवंबर, 2026 को धनतेरस के मौके पर प्लेटफॉर्म ने 1,81,763 यूनिट्स की ट्रेडिंग के साथ ₹26.46 करोड़ का आंकड़ा छुआ है। NSE का मुख्य लक्ष्य घरों में रखे करीब 25,000 से 35,000 टन बेकार पड़े सोने को फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम में लाना है, जिससे भारत का सालाना गोल्ड इंपोर्ट बिल $5 बिलियन से $6 बिलियन तक कम हो सकता है।
डिजिटल गोल्ड बनाम फिजिकल गोल्ड
18 मई, 2026 को लॉन्च हुए इस EGR फ्रेमवर्क में निवेशक महज 10 मिलीग्राम जैसे छोटे अमाउंट में सोना खरीद और बेच सकते हैं। ये रसीदें 995 या 999 शुद्धता वाले फिजिकल सोने से समर्थित हैं, जिन्हें SEBI-रेगुलेटेड वॉल्ट्स में सुरक्षित रखा जाता है। इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राहकों को स्टोरेज का कोई जोखिम नहीं उठाना पड़ता और सोने की शुद्धता की गारंटी मिलती है, जो पारंपरिक खरीद में अक्सर संदेह का विषय होती है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें और रिस्क
NSE अब डोर-टू-डोर कलेक्शन और सीधे डीमैट अकाउंट में क्रेडिट जैसी सुविधाएं लाने की तैयारी में है। हालांकि, निवेशकों को याद रखना चाहिए कि EGR एक फाइनेंशियल सिक्योरिटी है। यदि आप इसे वापस फिजिकल गोल्ड में बदलना चाहते हैं, तो इसमें कुछ समय और कन्वर्जन चार्ज, लॉजिस्टिक फीस और GST जैसे टैक्स लग सकते हैं। चूँकि यह अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए निवेशकों को लिक्विडिटी और वॉल्ट मैनेजर्स के नेटवर्क पर नजर रखनी चाहिए।
