NSE का डिजिटल गोल्ड में पहला कदम
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भारत के विशाल गोल्ड मार्केट में अपनी एंट्री का ऐलान किया है। दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंजों में से एक, NSE ने 18 मई 2026 को इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) की ट्रेडिंग शुरू की है। ये EGRs, सेबी (SEBI) के नियमों के तहत काम करते हैं और इनका मकसद सोने के व्यापार को ज्यादा पारदर्शी और कुशल बनाना है। इन EGRs के ज़रिए निवेशक सुरक्षित वॉल्ट में रखे 995 या 999 फीनेस वाले फिजिकल गोल्ड में निवेश कर सकेंगे।
बाज़ार में दस्तक और कॉम्पिटिशन
NSE का यह कदम भारत के गोल्ड मार्केट, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा है, में अहम बदलाव ला सकता है। हालांकि, EGRs को कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ेगा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पहले ही अक्टूबर 2022 से EGRs की ट्रेडिंग कर रहा है। इसके अलावा, MCX जैसे कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के फ्यूचर्स और ऑप्शंस का बड़ा वॉल्यूम ट्रेड होता है। गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में पहले से ही ₹1.78 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति (Assets) जमा है, जो डिजिटल गोल्ड में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है।
सरकारी पहल और अनुकूल माहौल
केंद्र सरकार भी डिजिटल गोल्ड को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को कम करने के लिए सोने के इम्पोर्ट को काबू में करने और हाल ही में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने जैसे सरकारी फैसलों से EGRs जैसे प्रोडक्ट्स के लिए एक अनुकूल माहौल बन रहा है।
EGRs के सामने बड़ी चुनौतियां
इन सबके बावजूद, NSE के EGRs को कई महत्वपूर्ण चुनौतियों से पार पाना होगा। इनमें सबसे बड़ी चुनौती लिक्विडिटी की है। अगर मार्केट मेकर्स और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की सक्रिय भागीदारी नहीं रही, तो रिटेल निवेशकों के लिए EGRs को बेचना मुश्किल हो सकता है और उन्हें प्राइस डिफरेंस का भी सामना करना पड़ सकता है। भारत में लोगों की फिजिकल गोल्ड रखने की पुरानी आदत भी एक बड़ी रुकावट है।
इसके अलावा, NSE के अतीत के गवर्नेंस मुद्दे, खास तौर पर 2010-2015 का को-लोकेशन स्कैम, जिस पर हेरफेर और इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप लगे थे, अभी भी निवेशकों के भरोसे को प्रभावित करते हैं। इन मुद्दों के चलते सेबी ने पेनल्टी भी लगाई थी। EGRs को फिजिकल गोल्ड में बदलने पर 3% का जीएसटी (GST) भी लगता है, जो एक अतिरिक्त लागत है। देश भर में 120 कलेक्शन सेंटरों का नेटवर्क मैनेज करना भी एक बड़ी एग्जीक्यूशन चुनौती है।
भविष्य की राह
EGRs की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि NSE कितनी जल्दी मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ा पाता है और निवेशकों को पारंपरिक गोल्ड ओनरशिप को डिजिटल सुविधा से जोड़ने के लिए शिक्षित कर पाता है। यह देखना अहम होगा कि इनका एडॉप्शन रेट गोल्ड ईटीएफ और MCX फ्यूचर्स की तुलना में कैसा रहता है। इस बीच, ओवरऑल मार्केट सेंटिमेंट की बात करें तो, पिछले एक साल में निफ्टी 50 (Nifty 50) इंडेक्स में 5.66% की गिरावट आई है।